नींद की कमी से बढ़ सकती हैं मस्तिष्क की समस्याएं
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अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए स्लीप एपनिया से पीड़ित 140 लोगों को शामिल किया गया था, जिनकी औसत आयु 73 वर्ष थी। शोधकर्ताओं ने रात की नींद के बाद दिमाग के एमआरआई के अध्ययन से डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि गहरी नींद न ले पाने की समस्या (जिसे स्लो-वेव या नॉन-आरईएम स्टेज 3 भी कहा जाता है) का सीधा संबंध ब्रेन एजिंग को बढ़ावा देने से देखा गया।
मसलन कोई व्यक्ति जितना कम समय गहरी नींद में बिताता है, उसका दिमाग उतना ही उम्रदराज दिखता है। यानी कि अगर आप गहरी नींद नहीं ले पा रहे हैं तो यह समय से पहले ही मस्तिष्क की उम्र को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है, इससे कम उम्र में ही डिमेंशिया जैसे रोगों का खतरा हो सकता है, जिसे आमतौर पर 60 की आयु के बाद होनें वाली समस्या माना जाता रहा है।