मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है। यह आपकी नींद को भी प्रभावित करती है, जिससे स्लीप एप्निया और पीठ दर्द होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। मोटापा से सिर्फ हृदय संबंधी समस्याएं ही नहीं होती, बल्कि इससे हमारी नींद की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापे से ग्रस्त लोग कम वजन वाले लोगों की तुलना में कम सोते हैं। ऐसे लोगों में स्लीप एप्निया की शिकायत होने की आशंका काफी अधिक होती है।
टेक्सास के डलास में यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ग्रेगरी कार्टर के मुताबिक, मोटापा स्लीप एप्निया के विकास के चार जोखिमों में से एक है। इस स्थिति में लोगों की सोते समय 30 सेकंड तक सांस बंद हो जाती है। अक्सर इससे पीड़ित लोग यह जान भी नहीं पाते कि उन्हें यह बीमारी है। इसके लक्षणों में खर्राटा लेना, थकान और शुष्क मुंह शामिल हैं।
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कार्टर कहते हैं, ''अगर आपके पास 30 से अधिक बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) है, तो स्लीप एप्निया के विकास की संभावना बढ़ जाती है।'' (सामान्य बीएमआई 18.5 और 24.9 के बीच होता है)। आमतौर पर मोटापा से ग्रस्त लोगों की गर्दन में अधिक वसा होती है, जिसका मतलब है कि वे अपने गले के पीछे वायुमार्गों में अधिक वसा रखते हैं। यह वसा मार्ग संकुचित करता है और वायु प्रवाह को रोकता है, जिससे श्वास की समस्याएं आती हैं।
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2008 के एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में स्लीप एप्निया की शिकायत थी, उनमें कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के होने की संभावना पांच गुना अधिक थी। कार्टर के अनुसार, ऐसा इसलिए है, क्योंकि बार-बार ऑक्सीजन के दिल से वंचित होने से स्थायी नुकसान होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत अमेरिकियों को अपने जीवन में किसी भी समय पीठ दर्द होता है। कार्टर कहते हैं, "जो लोग बहुत अधिक वजनी हैं, उनकी पीठ पर अधिक तनाव होता है।"
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नेशनल स्लीप फाउंडेशन द्वारा किए गए शोध से संकेत मिलता है कि मोटे लोग, जिन्हें पीठ और जोड़ों में लंबे समय से दर्द है, वे हर रात लगभग 42 मिनट नींद खो देते हैं। एसोफेगस वह नली होती है, जो गले से आपके पेट तक भोजन और पानी को ले जाती है। मोटापे के कारण अम्ल का प्रतिवाह होता है। ऐसे में गैस्ट्रिक जूस एसोफेगस में बहने लगती है। कई बार तो यह श्वास नली में आ जाती है, जिससे अम्लीयता और सीने में जलन का अनुभव होता है।
धूम्रपान करने, शराब पीने से यह समस्या और बढ़ती है। कार्टर का कहना है कि यदि आप अम्ल प्रतिवाह से ग्रस्त हैं, तो सोते समय अम्ल प्रति घंटे कई बार एसोफेगस में घुस सकते हैं, जिससे आप रात भर जाग सकते हैं। इन सभी स्थितियों के लिए अतिरिक्त वजन को जिम्मदार माना गया है। आप आहार में बदलाव करके इससे बचने की शुरुआत कर सकते हैं। जैसे कि भोजन का थोड़ा सा हिस्सा कम करना, फास्ट फूड और स्नैक्स से दूरी, हरी सब्जियां और फल के सेवन से अतिरिक्त वजन से बचा जा सकता है।मोटापा अपने आप में एक बीमारी है।
मोटा आदमी जब लेटा होता है, तो स्टमक से गैस्ट्रिक जूस कई बार आहार नली में आ जाता है। इससे एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या उत्पन्न होती है। इस जूस के श्वास नली में पहुंचने पर यह खतरनाक साबित हो सकती है। श्वास हमारे मुंह से होते हुए ट्रैकिया में और वहां से फेफड़ों तक पहुंचता है। मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह प्रक्रिया बाधित होती है और उनके फेफड़ों तक ऑक्सीजन कम पहुंचता है। ऐसी स्थिति में स्लीप एनालिसिस किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सी-पैट से प्रेशर दिया जाता है, ताकि फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंच सके। ऐसे में व्यक्ति बार-बार जाग जाता है। वजन ज्यादा होने से स्पाइन पर ज्यादा दबाव पड़ता है। डिस्क अपनी जगह से निकलकर नसों पर दबाव डालता है, जिससे पीठ में दर्द होता है।
-डॉ. संजीव कुमार, सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन, नई दिल्ली