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शराबियों को ज़्यादा काटते हैं मच्छर?

Fri, 22 Mar 2019 01:35 PM IST
प्रशांत राय बीबीसी हिंदी
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- फोटो : PTI

कुछ साल पहले मैंने डेनमार्क में एक विंटेज कार रैली में हिस्सा लिया। ये एक यादगार तजुर्बा रहा था। वैसे तो ये विंटेज कार रैली थी। मगर, इसमें कार से ज़्यादा ज़ोर फैंसी ड्रेस पहनने पर था। विंटेज कार रैली मॉन नाम के एक द्वीप पर जा कर ख़त्म हुई। देर रात तक नाचने-गाने और पीने-पिलाने के दौर के बाद सोने की बारी आई। मैंने सोचा कि गर्मियों के दिन हैं, तो चलो खुले आसमान तले किसी बेंच पर सो लेते हैं। ये मेरी ज़िंदगी की बहुत बड़ी भूल साबित हुई। उस रात मुझे तीन एकदम नई बातें पता चलीं। पहली तो ये कि गर्मियों में डेनमार्क में बहुत मच्छर हो जाते हैं। दूसरी बात ये कि ये मच्छर इतने भयंकर होते हैं कि वो चादरों और आप की कमीज़ के ऊपर से भी काट लेते हैं। तीसरी बात ये कि अगर आप ने शराब पी है, तो इसका मतलब मच्छरों को दावत दे दी है।

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उस रात मच्छरों का शिकार बनने के बाद जब मैं सुबह उठा तो मेरी हालत ख़राब थी। पूरा बदन अकड़ गया था। अमरीका की जर्नल ऑफ़ मॉस्क्विटो कंट्रोल एसोसिएशन की 2002 की रिपोर्ट कहती है कि अगर आप शराब पीते हैं, तो आपके मच्छर के शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है। अभी ये साफ़ नहीं है कि मच्छर पियक्कड़ों की तरफ़ क्यों खिंचे चले आते हैं?

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मच्छरों शराब को कैसे पहचानते हैं
अभी हमें ये पता है कि मच्छरों को हमारे होने का एहसास दो केमिकल से होता है। पहला तो है कार्बन डाई ऑक्साइड जिसे हम सांस छोड़ते वक़्त निकालते हैं। दूसरा ऑक्टानॉल, जिसे मशरूम एल्कोहल भी कहते हैं। क्योंकि मशरूम का स्वाद इसी केमिकल की वजह से आता है। ये केमिकल हमारे शरीर में एल्कोहल यानी शराब पीने के बाद बनता है। अब अगला सवाल ये उठता है कि क्या शराबियों का ख़ून पीने वाले मच्छर ख़ुद नशे में आ जाते हैं? लाखों बरस से मच्छर इंसान का ख़ून पीते आ रहे हैं. पर, इस बारे में रिसर्च बेहद कम हुई है कि क्या शराबी का ख़ून पीने से मच्छरों को भी नशा होता है?

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- फोटो : pexels.com

लाखों बरस से मच्छर इंसान का ख़ून पीते आ रहे हैं। पर, इस बारे में रिसर्च बेहद कम हुई है कि क्या शराबी का ख़ून पीने से मच्छरों को भी नशा होता है? मच्छरों की अमरीकी जानकार तान्या डैप्की, फ़िलाडेल्फ़िया की पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं। तान्या कहती हैं, ''मुझे नहीं लगता कि शराबी का ख़ून पीने से मच्छरों को भी नशा हो जाता है। वजह ये कि ख़ून में अल्कोहल की मात्रा इतनी होती नहीं है।'' लेकिन, आप ये जानकर हैरान होंगे कि कीड़े-मकोड़े शराब की बड़ी तादाद पचा ले जाते हैं।

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शराब कैसे पचाते हैं मच्छर
अमरीका की नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के कोबी स्कैल कहते हैं कि किसी ने 10 पेग शराब पी है, तो उसके ख़ून में अल्कोहल की मात्रा 0.2 प्रतिशत हो जाती है। लेकिन, अगर कोई मच्छर उस इंसान का ख़ून पीता है, तो उस पर शराब का बेहद मामूली असर होगा। इससे उनकी क्षमता पर असर नहीं पड़ता।मच्छरों का पाचन तंत्र भी ख़ास होता है। ख़ून के अलावा उनके पेट में कोई और चीज़ जाती है, तो वो एक अलग जगह जमा होती है। वहां मच्छर के एंजाइम उसे और तोड़-फोड़ डालते हैं। यानी, मच्छर के शरीर में शराब की मात्रा जाती भी है, तो उसके एंजाइम उसे नए केमिकल में बदल लेते हैं। इससे उनके दिमाग़ पर असर नहीं होता।

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लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम का रख-रखाव करने वाली एरिका मैकएलिस्टर कहती हैं कि बहुत से कीड़ों में ये ख़ूबी होती है कि वो नुक़सानदेह केमिकल को अपने खाने से अलग कर लेते हैं। फिर उसे धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकाल देते हैं। वो एल्कोहल से लेकर नुक़सान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया तक को एंजाइम से पचा लेते हैं। एरिका ने कीड़े-मकोड़ों पर एक किताब भी लिखी है, 'द सीक्रेट लाइफ़ ऑफ़ फ्लाईज़'। वो बताती हैं कि आम तौर पर पायी जाने वाली मक्खियां और मधुमक्खियां भी इस ख़ूबी से लैस होती हैं। वो सड़ रहे फलों से रस चूसती हैं, जबकि सड़ने के दौरान फलों में एल्कोहल बन जाता है।

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- फोटो : pexels.com

एरिका कहती हैं, ''मुझे मच्छरों को नशा होने का तो नहीं पता, पर मधुमक्खियां अक्सर एल्कोहल की वजह से नशे की शिकार होती हैं। उस दौरान उनका बर्ताव बदल जाता है। वो मस्ती करना शुरू कर देती हैं। अपना साथी चुनने में ज़्यादा मशक़्क़त नहीं करतीं। ज़्यादा एल्कोहल ले लेने के बाद मक्खियां होश खो बैठती हैं। 'मच्छर भी सड़ते हुए फल से रस चूसना पसंद करते हैं। सिर्फ मादा मच्छर ही ख़ून पीती है। इसकी वजह ये है कि उन्हें अंडे देने के लिए जो प्रोटीन चाहिए होता है, वो ख़ून से हासिल होता है। वैसे नर और मादा, दोनों ही मच्छर फलों और फूलों का रस पीते हैं, ताकि उन्हें एनर्जी मिले।तान्या कहती हैं, ''शराबी इंसान, मच्छरों को पसंद आना एक दिलचस्प बात है.''

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- फोटो : डेमो

खास जीन से भी खींचे आते हैं मच्छर
वैसे, बहुत से इंसानों के जीन में भी कुछ ऐसा होता है कि मच्छर उन्हें अपना शिकार ज़्यादा बनाते हैं। दुनिया की कुल आबादी के पांचवें हिस्से के जीन में ऐसी बात होती है कि मच्छर उनकी तरफ़ ज़्यादा खिंचते हैं। इनमें से एक वजह है ओ ब्लड ग्रुप। किसी और ब्लड ग्रुप के मुक़ाबले ओ ग्रुप के इंसान को मच्छर काटने की आशंका दो गुनी होती है। शरीर का तापमान ज़्यादा होने पर भी मच्छर खिंचे चले आते हैं। गर्भवती महिलाओं को भी मच्छर ज़्यादा काटते हैं। जो लोग अक्सर गहरी सांस छोड़ते हैं, मच्छर उन्हें भी ज़्यादा काटते हैं। क्योंकि वो ज़्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं और ये मच्छर को इंसान के होने का इशारा देती है।

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- फोटो : file photo

मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां शरीर के अलग हिस्सों को निशाना बनाती हैं। कुछ मच्छर पैर और पंजों में काटते हैं। तो कुछ गर्दन और चेहरे पर धावा बोलते हैं। शायद वो आपके मुंह और नाक से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड को सूंघते हुए वहां पहुंच जाते हैं। तान्या बताती हैं, ''जब मैं कोस्टा रिका गई, तो मच्छरों ने मेरे तलवे में काट खाया। ये कैसे मुमकिन हुआ?' शराब से निकलने वाला एथेनॉल भी इसी तरह मच्छरों को हमारी तरफ़ खींचता है। जब हम शराब पीते हैं, तो हमारे पसीने के साथ थोड़ी तादाद में एथेनॉल निकलता है। मच्छर इसकी गंध से इंसान तक पहुंच जाते हैं। 2010 में बर्किना फ़ासो में हुई एक रिसर्च भी इसी नतीजे पर पहुंची थी कि शराब या बीयर पीने के बाद मच्छरों के काटने की आशंका बढ़ जाती है। तान्या कहती हैं, ''अगर आप भूखे हैं और घूम फिर रहे हैं, तो आप के क़दम ख़ुद ब ख़ुद उस दिशा में बढ़ जाते हैं, जिधर से खाने की ख़ुशबू आती है।'' इसी तरह एथेनॉल से मच्छरों को इशारा मिलता है कि आस-पास भोजन उपलब्ध है। पर मैकएलिस्टर कहती हैं कि कई बार जेनेटिक कारणों से भी मच्छर ज़्यादा काटते हैं। ऐसे में मच्छरों के काटने के डर से एक या दो बीयर पीने से मना करना भी ठीक नहीं होगा।

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