कान की मांसपेशियां
कान की मांसपेशियां
जैरी कॉयेन अपनी किताब 'व्हाय इवॉल्यूशन इज ट्रू' में लिखते हैं, "अगर आप अपने कान हिला पाते हैं तो समझिए कि आप जैविक विकास के चलते-फिरते सबूत हैं।"जैरी ने ये कहते हुए इंसानी कान की तीन मांसपेशियों का जिक्र किया था।दुनिया में ज़्यादातर लोग अपने कानों को हिला नहीं पाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन मांसपेशियों की मदद से अपने कानों को हिला सकते हैं।इस बारे में सबसे पहले चार्ल्स डार्विन ने लिखा था। डार्विन इसे ट्यूबरकल कहते हैं।
डोरसा कहते हैं, "हालांकि, इस मुद्दे पर बहस जारी है कि इन मांसपेशियों को इंसान की जैविक प्रक्रिया में बेकार बचा हुआ सामान कहा जा सकता है या नहीं।तर्क ये दिया गया है कि कान के आसपास की मांसपेशियों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।"कॉयेन सुझाव देते हैं कि बिल्ली और घोड़े जैसे जीवों में ये मांसपेशियां आज भी कान हिलाने के काम आती हैं।इससे इन जीवों को शिकारियों का पता लगाने, अपने बच्चों की तलाश करने और दूसरी तरह की आवाजों को समझने में मदद मिलती है।