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Kidney Disease: क्या बच्चों में भी होती है किडनी की बीमारी? किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें

Mon, 16 Mar 2026 08:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बदलती जीवनशैली, ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी पीने की आदत किडनी की बीमारियों का जोखिम बढ़ा रही है। किडनी की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार हो सकते हैं। 
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बच्चों में किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepil.com
शरीर को स्वस्थ रखना है तो इसके लिए जरूरी है कि आपके सभी अंग ठीक तरीके से काम करते रहें। किडनी की सेहत को लेकर हमें और भी सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है। ये छोटा सा अंग कई बड़े-बड़े और महत्वपूर्ण कार्य लगातार बिना थके करता रहता है।

किडनी हमारे शरीर का नेचुरल फिल्टर है, जो खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी पेशाब के जरिए बाहर निकालता रहता है। किसी कारणवश अगर किडनी सही तरह काम नहीं करती, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं जिसका पूरे शरीर की सेहत पर असर पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि किडनी से संबंधित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके लिए खराब जीवनशैली, ज्यादा नमक-चीनी, प्रोसेस्ड फूड खाने और कम पानी पीने की आदत को जिम्मेदार माना जाता है। 

अक्सर लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि क्या बच्चों को भी किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर की समस्या हो सकती है?
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बच्चों में किडनी की बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
बच्चों में किडनी की बीमारी का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की बीमारी किसी को भी हो सकती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उम्र और लिंग वालों में इसका जोखिम देखा जाता रहा है। शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी के लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिनपर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। हालांकि अगर समय पर जांच और इलाज हो जाए, तो किडनी की समस्याओं को काफी हद तक कम किया सकता है।

दर्द निवारक दवाओं के अधिक सेवन, मोटापा, धूम्रपान जैसी आदतों को वयस्कों में किडनी की बीमारी बढ़ाने वाला माना जाता है, फिर बच्चों में ये समस्या क्यों होती है?

बच्चों में किडनी रोग के कारण वयस्कों से अलग हो सकते हैं। जन्मजात दोष, नेफ्रोटिक सिंड्रोम, बार-बार होने वाला यूरिन इन्फेक्शन और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां इसका कारण हो सकती हैं।
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किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepil.com
बच्चों में किडनी की बीमारी क्यों होती है?

स्टैनफोर्ड मेडिसिन की एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कई स्थितियां हैं जो बच्चों में किडनी की समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
 
  • किडनी में किसी वजह से खून का संचार कम होना।
  • डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), बहुत ज्यादा खून बह जाने, सर्जरी या शॉक की वजह से ये दिक्कत हो सकती है।
  • यूरिनरी ट्रैक्ट यानी पेशाब की नली में रुकावट।
  • ऐसी दवाएं बार-बार लेना जिनसे किडनी को नुकसान हो सकता है।
  • हीमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम भी बच्चों में किडनी की बीमारी का कारण है। यह आमतौर पर ई. कोलाई इन्फेक्शन की वजह से होता है।

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बच्चों में किडनी की समस्याओं का खतरा - फोटो : freepik.com
बच्चों में किडनी की बीमारी की पहचान क्या है?

किडनी की बीमारियों में वैसे तो शुरुआती स्थिति में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं पर कुछ बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। बच्चों में एक्यूट (अचानक होने वाली) और क्रॉनिक (लंबे समय से चली आ रही) किडनी की बीमारी के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

एक्यूट किडनी की बीमारी में आमतौर पर बुखार, त्वचा पर चकत्ते, खून वाला दस्त, उल्टी-पेट दर्द, पेशाब बिल्कुल न होना या बहुत ज्यादा होने, आंखों में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं क्रॉनिक बीमारियों में कुछ अन्य दिक्कतें भी हो सकती हैं।
 
  • भूख कम लगना-उल्टी
  • हड्डियों में दर्द और अक्सर सिरदर्द रहना
  • बच्चों के विकास में देरी।
  • पेशाब बहुत ज्यादा होना या बिल्कुल न होना
  • बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) होना
  • पेशाब पर कंट्रोल न रहना।
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किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या उपाय करें? - फोटो : Freepil.com
बच्चों की किडनी को कैसे हेल्दी रखें?

बच्चों में अगर किडनी की बीमारी की जोखिम आनुवांशिक है तो डॉक्टर की सलाह और इलाज जरूरी है। इसके अलावा बच्चों में किडनी की बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली की आदतों को अपनाना जरूरी है। 
  • बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं, शरीर में पानी की कमी न होने दें। 
  • बच्चों को ज्यादा नमक और चीनी वाली चीजें, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ न दें।
  • बच्चों के वजन को बढ़ने न दें।
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने वाले उपाय करें। दर्द वाली दवाएं कम दें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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