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सेहत की बात: क्या हमारे ब्रेन में भी बदलाव करने लगा है मोबाइल? लोगों में देखी जा रही हैं ये समस्याएं

Tue, 08 Sep 2026 06:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोबाइल का जरूरत से ज्यादा और खासकर रात में इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। शोध में  स्क्रीन टाइम के कारण सोने में समस्या, अनिद्रा के लक्षण और नींद आने में परेशानी का कारण बताया गया है। 
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मोबाइल का ब्रेन पर क्या असर हो रहा है? - फोटो : Amarujala.com/AI
मोबाइल हम सभी के जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने जाने से पहले तक हम सभी किसी न किसी वजह से मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं।

सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले स्क्रीन देखना, काम के बीच बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना, खाली समय में रील्स देखना और रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी फोन चलाते रहना आम आदत बन चुकी है। समस्या यह है कि हमें अक्सर लगता है कि मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ समय खा रहा है, लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि लगातार और खासकर रात में स्क्रीन का इस्तेमाल हमारी नींद, ध्यान लगाने की क्षमता और मानसिक प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकती है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल ने रिंगजाइटी की समस्या को बढ़ा दिया है, जिसका असर सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। इसके अलावा कुछ अध्ययनों में अलर्ट किया जा रहा है कि मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल हमारी दिमागी क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या मोबाइल हमारे दिमाग को भी बदलने लग गया है?
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
मोबाइल का ब्रेन पर क्या असर हो रहा है?

मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल यानी स्क्रीन टाइम और इससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरों को लेकर हालिया शोध में पाया गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद की समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है। 
 
  • इससे अनिद्रा के लक्षण, देर से सोने और नींद आने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • विश्लेषण में हर अतिरिक्त घंटे के स्क्रीन टाइम के कारण रात में सोने का समय में औसतन करीब 13 मिनट आगे बढ़ने की दिक्कत पाई गई है।
  • रात में देर से सोना या फिर कम सोना, दोनों को ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरे बढ़ाने वाला माना जाता रहा है। 
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नींद का मानसिक स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Freepik.com
नींद की कमी से फोकस और याददाश्त पर असर
 
  • नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए नहीं है। यह दिमाग की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए भी जरूरी है। अगर आप देर रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं तो इससे नींद का समय घटता है या नींद बार-बार टूटती है। इसका असर अगले दिन थकान और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।
 
  • विशेषज्ञ कहते हैं ये तो प्रमाणित नहीं होता है कि मोबाइल सीधे तौर पर हमारी याददाश्त को कम कर देता है, हालांकि शोध में ये देखा गया है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने से संज्ञानात्मक क्षमताएं कम हो सकती हैं। मसलन मोबाइल सीधे तौर पर तो हमारे ब्रेन को नहीं बदल रहा है बल्कि ज्यादा देर तक मोबाइल देखते रहने से कई ऐसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं जिसके चलते समय के साथ दिमागी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
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बढ़ता स्क्रीन टाइम हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
इससे बचें कैसे?

अब सवाल ये है कि फिर अपने ब्रेन हेल्थ को ठीक कैसे रखा जाए?

स्वास्थ्य  विशेषज्ञ कहते हैं, मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए इसे आराम देने की जरूरत होती है, जिसके लिए अच्छी नींद जरूरी है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से नींद की समस्याएं बढ़ रहा हा ऐसे में आपको आदतों में कुछ बदलाव करना चाहिए।
 
  • सोने का समय तय करें और बिस्तर पर लंबे समय तक फोन चलाने से बचें। नोटिफिकेशन कम करें और बिना काम के लगातार स्क्रॉल करने की आदत पर रोक लगाएं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के एक सर्वे में 87% वयस्कों ने बताया था कि वे नियमित रूप से अपने बेडरूम में फोन चलाते रहते हैं, इस आदत में बदलाव करके आप कई तरह के लाभ पा सकते हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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