उम्र बढ़ने का मतलब अक्सर हम सभी चेहरे पर झुर्रियां दिखने या बाल सफेद होने को मान लेते हैं, पर इसका असली मतलब शरीर के भीतर हर दिन हो रहे बदलावों से है। एक समय के बाद शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है और अलग-अलग अंगों पर उम्र का असर पड़ने लगता है। यही वजह है कि एक ही उम्र के दो लोगों का शरीर अंदर से एक जैसा नहीं होता। कोई अपनी उम्र से ज्यादा फिट दिख सकता है, तो किसी के शरीर पर उम्र का असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देने लगता है।
यहीं से ‘जैविक उम्र’ की बात सामने आती है। आसान भाषा में समझें तो जैविक उम्र का मतलब शरीर अंदर से किस रफ्तार से बूढ़ा हो रहा है। यह जन्म की तारीख से तय होने वाली उम्र से अलग होती है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि शरीर के तेजी से बूढ़ा होने का असर आगे चलकर किन बीमारियों के खतरे के रूप में सामने आ सकता है?
कैंसर के मामले में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण है। कैंसर तब होता है जब शरीर की कुछ कोशिकाओं में ऐसे बदलाव हो जाते हैं, जिनसे उनका बढ़ना और विभाजन सामान्य नियंत्रण से बाहर हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ ऐसे बदलावों की आशंका भी बढ़ जाती है। लेकिन अगर शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया ही अपेक्षाकृत तेज हो, तो क्या इसका संबंध कम उम्र में कैंसर होने के खतरे से भी हो सकता है?