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Yoga Day: क्या वास्तव में योग से डायबिटीज और दिल की बीमारियों का दूर होता है खतरा? क्या कहता है रिसर्च

Sun, 21 Jun 2026 01:09 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Yoga Day 2026: क्या रोज कुछ मिनट योग करने से शरीर सचमुच निरोग बन सकता है? शोध बताते हैं कि ध्यान और नियंत्रित श्वास से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर कम हो सकता है और पैरासिम्पेथेटिक गतिविधि बढ़ सकती है, जिससे हृदय गति और मानसिक तनाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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डायबिटीज-बीपी में कैसे मिलेगा आराम? - फोटो : Amarujala.com/AI
आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। दुनियाभर में लोगों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक फायदों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 21 जून को ये खास दिन मनाया जाता है। योग शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन को बढ़ावा देने का जबरदस्त तरीका माना जाता है। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित इस दिन को संयुक्त राष्ट्र ने सर्वसम्मति से अपनाया था, ताकि इस प्राचीन भारतीय पद्धति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों को बढ़ावा दिया जा सके।

हजारों साल पुरानी योग की भारतीय परंपरा को मेडिकल साइंस ने भी कई तरह से सेहत के लिए फायदेमंद बताया है। बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पाने के लिए योग अपना रहे हैं।

अक्सर लोगों के मन में बड़ा सवाल रहता है कि क्या योग से वास्तव में शुगर और ब्लड प्रेशर जैसे समस्याओं में लाभ पाया जा सकता है? आइए जान लेते हैं कि इस बारे में किए गए अध्ययनों में क्या परिणाम देखे गए हैं?
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नियमित योग का सेहत पर होने वाला असर - फोटो : Amarujala.com/AI
योग से शरीर कैसे होता है निरोग?

योग से डायबिटीज और हार्ट की समस्याओं में होने वाले फायदों को जानने से पहले इससे शरीर पर होने वाले प्रभावों को जान लेना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, योग किसी भी बीमारी का चमत्कारी इलाज नहीं है और न ही इसे दवाओं का विकल्प माना जा सकता है। हालांकि संतुलित आहार और अच्छी दिनचर्या के साथ नियमित योग अभ्यास अपनाने से समग्र स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।
 
  • श्वास नियंत्रण, ध्यान और कई योगासनों का शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत पर बेहतर परिणाम देखे गए हैं। 
  • शोध बताते हैं कि नियमित योग करने से तनाव कम हो सकता है, नींद बेहतर हो सकती है, शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार आ सकता है।
  • लचीलापन, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और शारीरिक कार्यक्षमता बढ़ाने में भी योग को काफी कारगर माना जाता रहा है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
योग से शुगर कंट्रोल और डायबिटीज में लाभ

कई अध्ययनों में ये साबित हो चुका है कि नियमित रूप से योग का अभ्यास डायबिटीज के शिकार लोगों की सेहत में सुधार करने में काफी मददगार हो सकता है। नियमित योग अभ्यास से टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c रिपोर्ट में काफी सुधार देखा गया है। 

 
  • अध्ययन से पता चलता है योग आपके अग्न्याशय को उत्तेजित करके इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है। नियमित और सही तरीके से किया गया योग अभ्यास शुगर कंट्रोल में बहुत लाभकारी हो सकता है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि योग का अभ्यास तनाव कम करता है। इससे कोर्टिसोल हार्मोन का प्रभाव घटता है। इसका ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म पर सीधा असर पड़ता है। 
  • योग को वजन घटाने के लिए भी असरदार तरीका माना जाता रहा है। अधिक वजन वाले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और शुगर बढ़े रहने का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दवाओं, संतुलित भोजन के साथ नियमित योग आपके शुगर कंट्रोल में बहुत मददगार हो सकता है।
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हृदय की समस्याओं का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Adobe stock Images
दिल की बीमारियों में योग से लाभ

डायबिटीज के अलावा योग को दिल की बीमारियों में सुधार के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता रहा है। 

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट से पता चलता है कि योग तनाव कम करके, दिल की धड़कन को धीमा करने और सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करता है। ये हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बहुत असरदार तरीका हो सकता है।
 
  • तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और खराब जीवनशैली हाई ब्लड प्रेशर के सबसे बड़े कारकों में से एक है।
  • योग के दौरान गहरी और नियंत्रित श्वास लेने से तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है, जिससे हृदय पर दबाव कम पड़ सकता है। 
  • नियमित योग अभ्यास से वजन कंट्रोल होता है जो हृदय रोगों से बचाव के लिए बहुत जरूरी है।


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स्रोत:
Impact of an Integrated Yoga Therapy Protocol on Insulin Resistance and Glycemic Control in Patients with Type 2 Diabetes Mellitus


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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