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Women's Health: खराब लाइफस्टाल बनती जा रही है महिलाओं की सेहत का दुश्मन, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?

Sun, 08 Mar 2026 11:51 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, महिलाएं कई गंभीर बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाती हैं, कई बीमारियां ऐसी भी होती हैं जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं। यही कारण है डॉक्टर कम उम्र से ही सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की सलाह देते हैं।
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महिलाओं में किन बीमारियों का खतरा अधिक होता है? - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में जिस तरह से क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसके चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। स्वस्थ जीवन जीने की चाहत हर किसी की होती है, लेकिन गड़बड़ जीवनशैली, तनाव, खानपान की आदतों और हार्मोनल बदलाव कम उम्र में ही कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, महिलाएं कई गंभीर बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाती हैं, कई बीमारियां ऐसी भी होती हैं जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं। यही कारण है डॉक्टर कम उम्र से ही सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की सलाह देते हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल में लैंगिक असमानताओं को दूर करने, समग्र कल्याण को बढ़ावा देने, बीमारियों से बचाव को लेकर सावधान और जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल  28 मई को अंतरराष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
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गठिया-हड्डियों में दर्द - फोटो : Freepik.com
आर्थराइटिस की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, वैसे तो बीमारियां किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती हैं, हालांकि 50 की उम्र के बाद महिलाओं की सेहत कई प्रकार से प्रभावित होने लग जाती है। इसके पीछे कई जैविक, हार्मोनल और जीवनशैली संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

यही वजह है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हृदय रोग, डायबिटीज, आर्थराइटिस, सांस की समस्या और एनीमिया के मामले काफी ज्यादा देखे जाते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, वजन बढ़ना और अनुचित खानपान के कारण भी आपमें गठिया का जोखिम अधिक हो सकता है।
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महिलाओं में थाइरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में थायरॉइड का जोखिम

अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, दुनियाभर में 200 मिलियन (20 करोड़) से अधिक लोग इस विकार का शिकार हैं। थायरॉइड विकार बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिला-पुरुष किसी को भी हो सकता है। हालांकि आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में थायरॉइड की समस्याओं का अधिक जोखिम होता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड विकार की आशंका 8 से 10 गुना अधिक होती है। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन (जैसे प्रेग्नेंसी, पीरियड्स, मेनोपॉज आदि) उन्हें इस विकार के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों के बढ़ते मामले

हृदय रोग का खतरा भी दुनियाभर में बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रभावित करता है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लाखों महिलाएं दिल की बीमारियों के कारण जान गंवाती हैं। महिलाओं में बढ़ते हृदय रोग के मामलों के लिए  एस्ट्रोजन हार्मोन के असंतुलन को एक बड़ा कारण माना जाता है जिससे रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है।

तनाव और अवसाद की समस्या भी महिलाओं में अधिक देखी जाती है, जो हृदय रोग को बढ़ा सकती है। नियमित व्यायाम और ब्लड प्रेशर की जांच, संतुलित आहार के साथ धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर आप हृदय रोगों से बची रह सकती हैं।
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कैंसर का इलाज - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में कैंसर के मामले

कुछ प्रकार के कैंसर के मामले भी महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। भारत में भी यह कैंसर काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसी तरह से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम भी हाल के वर्षों में बढ़ा है।  

कैंसर के बढ़ते जोखिमों के लिए फैमिली हिस्ट्री, मोटापा और हार्मोनल असंतुलन को जिम्मेदार माना जाता है। सर्वाइकल कैंसर के लिए एचपीवी संक्रमण को जिम्मेदार माना जाता है जिससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती रही है।
  • डॉक्टर कहते हैं, महिलाओं को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और इन बीमारियों के प्रति जागरूक रहें।
  • नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित आहार, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
  • युवावस्था से ही इन बातों का पालन कर महिलाएं न सिर्फ इन बीमारियों से बच सकती हैं, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जी सकती हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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