फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Intermittent fasting: वजन कम करने का यह तरीका मां बनने में बन सकती है बाधा, शोधकर्ताओं ने किया अलर्ट

Tue, 01 Nov 2022 02:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
इंटरमिटेंट फास्टिंग से होने वाले दुष्प्रभाव - फोटो : iStock
वजन कम करने के लिए जिन तरीकों को वैश्विक रूप से सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता रहा है, इंटरमिटेंट फास्टिंग उनमें से एक है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में एक निश्चित समय में ही कुछ खाना होता है। इसके अलावा हर दिन 6-8 घंटे के लिए उपवास और फिर हल्के-पौष्टिक आहार का सेवन किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करके आसानी से फैट बर्न करने में मदद मिल सकती है। साल 2014 में अध्ययनों की समीक्षा के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग के माध्यम से 3-24 सप्ताह की अवधि में शरीर का वजन 3-8% कम किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन काफी बढ़ा है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने इंटरमिटेंट फास्टिंग से महिलाओं में होने वाले कुछ दुष्प्रभावों को लेकर अलर्ट किया है। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग महिलाओं के प्रजनन हार्मोन को प्रभावित कर देती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तरीके को प्रयोग में लाने वाली महिलाओं में मां बनने से संबंधित समस्याओं के बारे में पता चला है। हार्मोन्स असंतुलन के कारण प्रजनन के साथ-साथ शरीर में और भी कई प्रकार की जटिलताओं का जोखिम हो सकता है, ऐसे में बिना डॉक्टरी सलाह के ऐसे उपायों को प्रयोग में लाने से बचा जाना चाहिए।

आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
इंटरमिटेंट फास्टिंग के साइड इफेक्ट्स - फोटो : iStock
महिलाओं में देखा गया डीएचईए हार्मोन अंसतुलन

जर्नल ओबेसिटी में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाली महिलाओं में डीएचईए हार्मोन अंसतुलन से संबंधित जोखिम देखे गए हैं। अध्ययन से पता चला है कि यह आहार पैटर्न, शरीर में आवश्यक इस हार्मोन के उत्पादन में कमी का कारण बनता है, जिसका अंडे की गुणवत्ता और ओवरी के कार्यों पर भी प्रभाव देखा गया है। 

Dehydroepiandrosterone (DHEA) हार्मोन, स्वाभाविक तौर पर एडर्नल ग्रंथि द्वारा उत्पादित होता है। डीएचईए, टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन सहित अन्य हार्मोन का उत्पादन करने में भी मदद करता है। इस हार्मोन में होने वाली कमी के कारण यौन रोग, सेक्स ड्राइव में कमी (कामेच्छा), नपुंसकता-बांझपन आदि का खतरा हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
महिलाओं में डीएचईए हार्मोन के स्तर में कमी - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

इंटरमिटेंट फास्टिंग से महिलाओं में होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस में प्रमुख शोधकर्ता डॉ क्रिस्टा वैरिटी के नेतृत्व वाली टीम ने 8 सप्ताह तक अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि फास्टिंग से वजन तो कम हो सकता है, पर इसके कारण महिलाओं में डीएचईए हार्मोन के स्तर में कमी देखी गई है। मेनोपॉज के पहले और बाद की दोनों महिलाओं में इस हार्मोन की कमी रिपोर्ट की गई है। शोधकर्ताओं ने इस आधार पर बताया कि जो महिलाएं मां बनना चाह रही हैं फिलहाल उनके लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग को सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता है।

4 of 5
इंटरमिटेंट फास्टिंग का प्रजनन क्षमता पर असर - फोटो : REUTERS
डीएचईए के स्तर में गिरावट समस्याकारक

अध्ययनकर्ता डॉ वैरिटी कहती हैं, वैसे तो इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाली महिलाओं में सेक्स ड्राइव से संबंधित समस्याएं तो नहीं देखी गई हैं, पर अध्ययन के दौरान किए गए ब्लड टेस्ट में डीएचईए हार्मोन अंसतुलन के बारे में जरूर पता चला है। यह हार्मोन चूंकि प्रजनन के लिए आवश्यक है और अंडों की गुणवत्ता के लिए जरूरी माना जाता है, ऐसे में इसकी कमी के कारण मां बनने में समस्या जरूर हो सकती है। मेनोपॉज के बाद डीएचईए के स्तर में गिरावट और भी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है क्योंकि इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन में भी कमी होने लगती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इंटरमिटेंट फास्टिंग के बारे में डॉक्टर से लें सलाह - फोटो : istock
क्या कहती हैं अध्ययनकर्ता?

शोधकर्ता क्रिस्टा कहती हैं, डीएचईए हार्मोन के बढ़ने को स्तन कैंसर के जोखिम से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में इसमें होने वाली कमी उस जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है, पर इसके अन्य जोखिमों के बारे में लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। महिलाएं अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग करना चाहती हैं तो इससे पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। वजन कम करने के लिए दूसरे सुरक्षित विकल्पों को भी प्रयोग में लाया जा सकता है।  


---------------
स्रोत और संदर्भ

Effect of time-restricted eating on sex hormone levels in premenopausal and postmenopausal females

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें