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Health Alert: सावधान- इंसुलिन प्रतिरोध से सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, इन गंभीर रोगों का भी बढ़ जाता है खतरा

Sun, 23 Jul 2023 11:58 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock
डायबिटीज रोगियों में अक्सर आपने इंसुलिन रेजिस्टेंस या इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या के बारे में सुना होगा? पर क्या आप जानते हैं कि असल में ये समस्या है क्या?

इंसुलिन हार्मोन, रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। इंसुलिन प्रतिरोध तब होता है जब, शरीर की कोशिकाएं इस हार्मोन के प्रति सामान्य रूप से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। इससे ग्लूकोज कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता और इसकी मात्रा खून में बढ़ने लगती है। यही कारण है कि इससे टाइप-2 डायबिटीज रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है।

पर क्या आप जानते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने और डायबिटीज के लिए ही समस्याकारक नहीं है, यह स्थिति शरीर में कई अन्य प्रकार की गंभीर बीमारियों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं। डायबिटीज रोगियों में कई प्रकार की बीमारियों के बढ़ने का यही कारण होता है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण डायबिटीज का खतरा - फोटो : istock
कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम

जब हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति बहुत अधिक प्रतिरोधी हो जाती हैं, तो इससे रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिसे हाइपरग्लेसेमिया कहा जाता है। डायबिटीज रोगियों में यह काफी आम है। पर अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो इसके कारण शरीर में और भी कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ने लग जाती हैं।

ऐसे रोगियों में मोटापा, हृदय से संबंधित रोग, नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ( एनएएफएलडी), मेटाबॉलिज्म से संबंधित दिक्कत और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी बीमारियों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। 
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मेटाबॉलिज्म की समस्याओं का खतरा - फोटो : istock
बढ़ने लगती हैं मेटाबॉलिज्म की दिक्कतें

इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या का सबसे बड़ा जोखिम मेटाबॉलिक सिंड्रोम के रूप में देखा जाता है, इसके कारण आपके पाचन गड़बड़ हो सकता है, कमर के आसपास अतिरिक्त फैट जमा होने-वजन बढ़ने की समस्या के अलावा यह हृदय रोग-स्ट्रोक के जोखिम को भी बढ़ा देती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि  मेटाबोलिक सिंड्रोम की समस्या वाले लोगों में हृदय रोगों के गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक हो सकता है।

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इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या का असर - फोटो : iStock
महिलाओं की सेहत पर असर

इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या महिलाओं में कई प्रकार की दिक्कतों को बढ़ाने वाली मानी जाती है। ऐसे महिलाओं में मुंहासे, पीसीओएस और बांझपन का खतरा भी हो सकता है। 

जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के कारण प्रजनन और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में समस्याएं हो सकती हैं। यह समस्या मेनोपॉज की जटिलताओं और गर्भधारण में कई दिक्कतों का कारण बनती है।
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व्यायाम से ठीक रहता है इंसुलिन की दिक्कत - फोटो : istock
इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे ठीक किया जा सकता है?

डॉक्टर कहते हैं, इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या को ठीक नहीं किया जा सकता है, जिन डायबिटीक लोगों में दवाओं से भी ये कंट्रोल नहीं हो पाता है उन्हें इंसुलिन इंजेक्शन की दिक्कत हो सकती है। हालांकि जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इसे कंट्रोल करने के प्रयास जरूर किए जा सकते हैं। 
  • प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट तक व्यायाम करें।
  • अच्छी नींद लें और तनाव मुक्त रहें।
  • वजन कंट्रोल रखें और पौष्टिक आहार लें।
  • लाइफस्टाइल को ठीक रखकर इंसुलिन की गतिविधियों को कंट्रोल किया जा सकता है, पर फिर भी अगर ये कंट्रोल न हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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