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Diabetes: डायबिटीज में कब पड़ती है इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत, ये कैसे करती है काम? आसान भाषा में समझें

Thu, 26 Feb 2026 05:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Insulin Injection Uses In Hindi: इंसुलिन इंजेक्शन डायबिटीज मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है, खासकर जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता तो ये इंजेक्शन दिया जाता है। इंसुलिन सही समय पर और सही डोज में लेना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि किन मरीजों को इसकी जरूरत पड़ सकती है?
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डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन की कब होती है जरूरत? - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल अक्सर हाई रहता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है। अगर शुगर कंट्रोल में नहीं रहता तो इसका आपकी किडनी, आंखों, तंत्रिकाओं और हृदय की सेहत पर असर हो सकता है।

अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर के कारण दिमाग की बीमारी और हाथों की समस्याएं भी होने का खतरा देखा गया है। डायबिटीज धीरे-धीरे शरीर को खोखला बनाती जाती है, इसलिए इस बीमारी को लेकर कम उम्र से ही विशेष सावधानी और सतर्कता जरूरी है।

डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए वैसे तो कई प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं जो शुगर कंट्रोल रखने के साथ दूसरे अंगों को होने वाली क्षति कम करने में मदद करती हैं। हालांकि कुछ लोगों को आपने शुगर कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन लेते हुए देखा होगा? आखिर इसकी क्या जरूरत है और ये कैसे काम करती है, आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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डायबिटीज और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
इंसुलिन इंजेक्शन आखिर है क्या?

अमर उजाला से एक बातचीत में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ आमिर शेख बताते हैं, इंसुलिन इंजेक्शन डायबिटीज मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है। जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता और दवाओं की मदद से भी शुगर को ठीक तरीके से कंट्रोल करना कठिन हो जाता है तो ऐसी स्थिति में ये इंजेक्शन दिया जाता है। 
 
  • टाइप-1 डायबिटीज में शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देती है, जिससे इंसुलिन बनना लगभग बंद हो जाता है। ऐसे मरीजों को जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता है। 
  • वहीं टाइप 2 डायबिटीज में दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव से शुगर कंट्रोल हो सकती है, लेकिन जब ब्लड शुगर लगातार ज्यादा रहे या पैंक्रियास की क्षमता घट जाए तब ऐसे लोगों को भी इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
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डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन - फोटो : Freepik.com
किन लोगों को पड़ती है इस इंजेक्शन की जरूरत?

यहां जानना जरूरी है कि इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर उसे ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जब शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है या शरीर इस हार्मोन का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो कोशिकाओं की जगह खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। इंसुलिन इंजेक्शन से खून में शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है।
 
  • इंसुलिन का इंजेक्शन त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) दिया जाता है, जिससे यह धीरे-धीरे ब्लडस्ट्रीम में जाकर शुगर को नियंत्रित करता है। 
  • इंसुलिन इंजेक्शन कितनी बार  लगाना है, यह मरीज की शुगर प्रोफाइल पर निर्भर करता है। 
  • यदि फास्टिंग शुगर बहुत ज्यादा हो, HbA1c रिपोर्ट 7% से ऊपर बनी रहती है, गर्भावस्था में डायबिटीज हो गया हो या कोई गंभीर सर्जरी हो रही हो, तब डॉक्टर इंसुलिन शुरू कर सकते हैं। 
  • कुछ मामलों में दवाएं असर नहीं करतीं या जिन्हें किडनी-लिवर की समस्या हो, उनके लिए भी इंसुलिन ज्यादा सुरक्षित और असरदार विकल्प माना जाता है।

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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैसे काम करता है इंजेक्शन?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन, शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले इंसुलिन हार्मोन की तरह से काम करता है। 
 
  • पेट, जांघों या हिप्स के फैटी टिशू (सबक्यूटेनियस) में इस इंजेक्ट करने किया जाता है।
  • यह खून से शुगर को शरीर के दूसरे टिशू में ले जाने में मदद करके काम करता है, जहां इसका इस्तेमाल एनर्जी के लिए किया जाता है। 
  • यह लिवर को अतिरिक्त शुगर बनाने से भी रोकता है। 

इंसुलिन इंजेक्शन लिक्विड के रूप में आता है। कुछ लोगों को दिन में एक से ज्यादा बार इंसुलिन की जरूरत हो सकती है। सुई या सिरिंज को कभी भी दोबारा इस्तेमाल न करें। न ही इसे किसी और के साथ साझा करें।
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इंसुलिन का इंजेक्शन - फोटो : Freepik.com
इन सावधानियां का रखें ध्यान?

एक ही जगह पर इंजेक्शन नहीं लगाना चाहिए। एक ही जगह पर इंजेक्शन लगाने से लिपोहाइपरट्रॉफी हो सकती है,  इससे त्वचा के नीचे गांठ बन सकती है।
 
  • एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करने से इन्फेक्शन, दर्द का खतरा बढ़ जाता है।
  • जहां पर चोट लगी है, जहां स्किन मुलायम हो या गांठ वाली जगहों पर इंजेक्शन लगाने से बचें। नाभि से 2 इंच ही इंजेक्शन लगाना चाहिए।
  • इस्तेमाल हो रहे वायल या इंजकेश्न पेन को कमरे के तापमान पर रखें। बहुत ज्यादा गर्मी या सीधी धूप से इसे बचाएं।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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