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नींद ना आना बन सकता है जानलेवा, जानिए क्यों है खतरनाक

Tue, 11 Oct 2016 12:51 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
नींद ना आने को इंसोमनिया कहते हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति को कुछ समस्याओं जैसे नींद न आना, रात के समय अक्सर नींद खुल जाना, फिर से नींद न लगना या जल्दी नींद खुल जाना का सामना करना पड़ता है।

 
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इंसोमनिया का इलाज विशेष तौर पर डॉक्टर द्वारा किया जाना चाहिए क्योंकि इसके कारण आगे चलकर कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जो जीवन के लिए घातक हो सकती हैं।
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- फोटो : demo
इंसोमनिया के दुष्परिणामों में दिन भर में थकान महसूस करना और चिड़चिड़ापन होना शामिल है। इससे ध्यान केन्द्रित करने में भी समस्या आती है।

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जब हमारी नींद पूरी नहीं होती तो दिमाग सही तरीके से काम नहीं करता। यह हमारे तर्क, समस्या सुलझाने की क्षमता, सतर्कता, एकाग्रता और ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है।
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- फोटो : Getty Images
इंसोमनिया के कारण सड़क पर दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। इंसोमनिया से ग्रसित ड्राइवर्स के कारण सड़क पर कई दुर्घटनाएं भी होती हैं। इससे याददाश्त में भी कमी आ सकती है। इससे हमारी निर्णय लेने की क्षमता भी क्षीण हो जाती है।
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इसके कारण डाइबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, दिल की बीमारी और दिल की धड़कन का अनियमित होना आदि बीमारियां हो सकती हैं। शोध से पता चला है कि इंसोमनिया से ग्रसित लोगों की मृत्यु हार्ट अटैक से जल्दी होने का खतरा होता है।
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- फोटो : Getty Images
इंसोमनिया के कारण त्वचा की उम्र जल्दी बढ़ने लगती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, फाइन लाइंस और झुर्रियों की समस्या आ सकती है। जब आप इंसोमनिया से ग्रसित होते हैं तो कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन स्त्रावित होता है। यह हार्मोन कोलेजन को तोड़ देता है।
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- फोटो : Getty Images
कोलेजन त्वचा के कसाव और लचीलेपन के लिए जिम्मेदार होता है। इंसोमनिया के कारण वजन भी बढ़ता है। यह न केवल भूख को उत्तेजित करता है तथा इसके कारण कार्बोहाइड्रेट और फैट युक्त आहार लेने की इच्छा बढ़ जाती है।
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