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Measles in India: खसरा संक्रमण-मौत के मामलों में अचानक वृद्धि ने बढ़ाई चिंता, जानिए इसके लक्षण और बचाव के उपाय

Fri, 11 Nov 2022 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खसरा संक्रमण के बढ़े मामले - फोटो : istock
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पिछले दिनों, बच्चों में खसरा के मामलों में वृद्धि और मौत ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक खसरा के कारण तीन बच्चों की मौत  रिपोर्ट की गई है, हालांकि इसकी जांच की जा रही है। खसरा के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्लम क्षेत्रों में खसरा के प्रकोप का आकलन करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की टीम भेजी है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने शहर में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। बीएमसी के अधिकारियों ने माता-पिता से अपने 9 और 16 महीने के बच्चों को खसरा और रूबेला का टीका लगवाने की भी अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई में इस साल जनवरी से अक्टूबर तक खसरा और रूबेला के 90 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 74 मामले खसरा के जबकि शेष रूबेला के हैं। बीएमसी के जन स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने मीडिया को बताया- “पूरे शहर में खसरा के मामलों में तेजी आई है, जिसके बाद हमने एकीकृत सर्वेक्षण और घर-घर जाकर जांच शुरू करा दी है। इसके अलावा गोवंडी में खसरा से एक डेढ़ वर्षीय लड़के की मौत की पुष्टि की गई है और अन्य तीन मौतों की समीक्षा की जा रही है। सभी लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर भी खसरा से बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।
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खसरे का टीकाकरण जरूरी (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
ज्यादातर संक्रमित बच्चों का नहीं हुआ है टीकाकरण 

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया, घर-घर जाकर खसरा व रूबेला के संदिग्ध मरीजों का सर्वे किया जा रहा है, संदिग्धों के रक्त और मूत्र के नमूने जांच के लिए लिए जा रहे हैं। सर्वेक्षण में खसरे के कुल मामलों में से, लगभग 10 प्रतिशत बच्चों का आंशिक रूप से टीकाकरण हुआ है, जबकि 25 फीसदी का टीकाकरण न हो पाने के बारे में पता चला है। टीकाकरण की कमी के कारण ही मामलों में इस तरह से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

फिलहाल इस खतरे के प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। सभी माता-पिता को खसरा के लक्षणों के बारे में जानना और समय पर इलाज के साथ इसकी रोकथाम को लेकर भी जागरूक किया जा रहा है। 
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बच्चों में खसरा के लक्षणों को जानिए - फोटो : istock
खसरा और इसके लक्षण

खसरा, वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है। छोटे बच्चों के लिए यह संक्रमण गंभीर और घातक भी हो सकता है। दुनियाभर में खसरा के टीकाकरण में आई तेजी के कारण पिछले कुछ वर्षों में इसकी मृत्यु दर में कमी आई है, हालांकि अब भी इस गंभीर संक्रमण के कारण हर साल दो लाख से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। खसरा के लक्षण, वायरस के संपर्क में आने के लगभग 10 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। इन संकेतों पर सभी लोगों को विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 
  • बुखार-खांसी
  • बहती नाक- गला खराब होना
  • कंजंक्टिवाइटिस
  • गाल की अंदरूनी परत में छोटे सफेद धब्बे दिखना, जिन्हें कोप्लिक स्पॉट भी कहा जाता है।
  • त्वचा पर चकत्ते या दाने दिखाई देना।

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खसरा से बचाव के उपाय करें - फोटो : Pixabay
खसरा का जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में कुछ स्थितियां खसरे के जोखिमों को बढ़ा देती हैं। यदि आपको खसरा का टीका नहीं लगा है तो इस संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा यदि आप उन देशों की यात्रा करते हैं जहां खसरा के मामले अधिक हैं, यह स्थिति भी जोखिमों को बढ़ाने वाली मानी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि जिन बच्चों में विटामिन-ए की कमी होती है उनमें खसरा होने और इसके लक्षणों और गंभीर जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
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खसरा से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी - फोटो : PTI
खसरा का इलाज और बचाव

खसरा संक्रमण का कोई विशिष्ट उपचार नहीं होता है। इलाज के दौरान लक्षणों को कम करने के प्रयास किए जाते हैं। गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण की स्थिति में गंभीर जटिलताओं के विकसित होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
 
यदि आपको या बच्चे को खसरा की समस्या है तो आराम करें और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। खांसी और गले की खराश से राहत पाने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। सहायक उपचार के लिए डॉक्टर की समय पर सहायता जरूर लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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