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गठिया से बचना है तो पाचन रखें दुरुस्त, खानपान में बरतें सावधानी, इन चीजों से बनाएं दूरी

Mon, 26 Aug 2019 04:48 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
गठिया रोग की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। बुजुर्गों को होने वाली यह बीमारी अब युवाओं को भी तेजी से चपेट में ले रही है। आयुर्वेद के अनुसार, गठिया खराब वात दोष के कारण होता है। लोहिया अस्पताल के आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक बताते हैं कि गठिया तीन प्रकार का होता है। रूमेटी गठिया, आस्टियो आर्थराइटिस और गाउट। रूमेटी गठिया को आयुर्वेद में आम वात कहा जाता है। खराब पाचन के कारण जमा हुए विषाक्त पदार्थ को अमा कहते हैं और वात एक प्रकार का दोष या जैविक ऊर्जा है। अमा पूरे शरीर में फैलकर कमजोर जोड़ों पर जमा होता है और फिर वात तेज हो जाता है। इससे सूजन पैदा होती है और आखिर में गठिया में परिवर्तित हो जाता है।
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डॉ एस. कें. पांडेय - फोटो : amar ujala
इसी तरह आस्टियो आर्थराइटिस को आयुर्वेद में संधिगत वात के सामान माना जाता है। यह तब होता है जब असंतुलित वात जोड़ों को अपना घर बना लेते हैं। मीनोपाज के प्रभाव के कारण यह महिलाओं में अधिक होता है। यह आमतौर पर घुटनों, एड़ियों, रीढ़ की हड्डियों और कूल्हों के जोड़ों को प्रभावित करता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब शरीर में कैल्शियम कम होने लगता है या उम्र के प्रभाव के कारण बुढ़ापा आने लगता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
इसी तरह आस्टियो आर्थराइटिस को आयुर्वेद में संधिगत वात के सामान माना जाता है। यह तब होता है जब असंतुलित वात जोड़ों को अपना घर बना लेते हैं। मीनोपाज के प्रभाव के कारण यह महिलाओं में अधिक होता है। यह आमतौर पर घुटनों, एड़ियों, रीढ़ की हड्डियों और कूल्हों के जोड़ों को प्रभावित करता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब शरीर में कैल्शियम कम होने लगता है या उम्र के प्रभाव के कारण बुढ़ापा आने लगता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेद में गाउट को वात रक्त कहा जाता है। यह खराब वात और रक्त के कारण होता है। जब खराब वात और रक्त हाथों और पैरों की अंगुलियों में जमा होने लगते हैं तब गाउट की समस्या पैदा होती है। यह नमकीन, मसालेदार और खट्टे खाद्य पदार्थों के सेवन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण होता है। यह बहुत दर्दनाक स्थिति होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
मेथी, सोंठ, लहसुन गठिया में फायदेमंद
गठिया की दिक्कत से बचने के लिए पाचन दुरुस्त रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए चाय, काफी, देर से भोजन करने और मसालेदार भोजन से बचें। इसके अलावा मेथी, लहसून और सोंठ सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द में फायदेमंद है। सुबह-शाम एक-एक चम्मच मेथी खाने से फायदा मिलेगा। इसी तरह चार-पांच कली लहसुन एक गिलास दूध में उबाल लें। फिर लहसुन निकालकर खा लें और दूध पी लें। ऐसा 21 दिन या डॉक्टर की सलाह से लेकर देखें। इसी तरह सोंठ सुबह-शाम खाने के बाद एक-एक चम्मच खाने से जोड़ों के दर्द में आराम देता है। सबसे बेहतर है कि दिनचर्या को सही रखते हुए खान-पान का ध्यान दें। 
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