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Health Tips: डॉक्टर से जानें पांच कारण, क्यों जरूरी है फाइबर का सेवन?

Tue, 03 Feb 2026 02:30 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Fiber and Gut Lining Damage: एक स्वस्थ शरीर के लिए फाइबर सबसे जरूरी तत्वों में से एक है। मगर बहुत से लोग अपने आहार पर इतना ध्यान नहीं देते हैं। आज के आधुनिक जीवनशैली में इसकी कमी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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फाइबर रिच फूड्स - फोटो : Adobe Stock
Benefits of Dietary Fiber: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग अपने खाने पीने पर ध्यान नहीं दे पाते हैं और ऐसे डाइट का पालन करते हैं जिसमें रिफाइंड फूड (मैदा, चीनी) की मात्रा अधिक होती है। हाल ही में डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर सचेत किया है कि फाइबर की कमी केवल कब्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के सुरक्षा तंत्र को बूरी तरह प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर शालिनी के अनुसार फाइबर हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। 

जब हम कम सब्जियां और फल खाते हैं, तो शरीर में शुगर, फैट और टॉक्सिन्स से होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। जब किसी व्यक्ति की डाइट में फाइबर की कमी होती है तो मेटाबॉलिक बीमारियों जैसे कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए आइए इस लेख में डॉक्टर से जानते हैं कि इससे लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है और साथ ही ये भी जानेंगे कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति को दिनभर में कितना फाइबर खाना चाहिए।


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पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock
आंतों की सुरक्षा और शुगर स्पाइक पर नियंत्रण
फाइबर की कमी सीधे तौर पर हमारी गट लाइनिंग (आंत की परत) को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है। डॉक्टर शालिनी बताती हैं कि फाइबर की कमी से शुगर स्पाइक की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जब भोजन में फाइबर होता है, तो वह शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है। इसकी कमी होने पर खून में ग्लूकोज का लेवल अचानक बढ़ता है, जो सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज को जन्म देता है।

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हाई कोलेस्ट्रॉल - फोटो : Freepik.com
कोलेस्ट्रॉल का बढ़ता स्तर और हृदय स्वास्थ्य
फाइबर शरीर में झाड़ू की तरह काम करता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालता है। अगर आहार में फाइबर कम होगा, तो यह गंदा फैट धमनियों में जमा होने लगेगा, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 

फाइबर की कमी न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, बल्कि यह फैटी लिवर का जोखिम भी की गुना बढ़ जाता है, जिससे शरीर का मुख्य फिल्टर (लिवर) भी सुस्त पड़ने लगता है। डॉक्टर सोलंकी के मुताबिक एक स्वस्थ्य व्यक्ति को दिनभर में 25-30 ग्राम फाइबर जरूर खाना चाहिए।

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कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैंसर का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर की कमी शरीर में ब्यूटिरेट नामक एक आवश्यक शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के उत्पादन को कम कर देती है। ब्यूटिरेट आंतों की कोशिकाओं को ऊर्जा देता है और उन्हें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाता है। शोध बताते हैं कि फाइबर युक्त आहार का सेवन न करने से कोलन कैंसर और अन्य इन्फ्लेमेटरी बीमारियों का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
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एंटी एजिंग - फोटो : Adobe Stock
हार्मोनल असंतुलन और समय से पहले बुढ़ापा
फाइबर की कमी केवल आंतरिक अंगों को ही नहीं, बल्कि आपके एजिंग(समय से पहले बुढ़ापा) को भी प्रभावित करती है। यह हार्मोनल असंतुलन का कारण बनती है और प्रिमेच्योर एजिंग की प्रक्रिया को तेज कर देती है। पर्याप्त फाइबर न लेने से चेहरे पर झुर्रियां और शरीर में एनर्जी की कमी जल्दी दिखने लगती है। इसलिए अपनी डाइट में साबुत अनाज, दालें और मौसमी सब्जियों को शामिल करना बहुत जरूरी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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