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आईसीएमआर रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में दर्ज हो रहे कैंसर के सबसे ज्यादा मामले, सामने आई डर बढ़ाने वाली वजह

Sat, 26 Sep 2026 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में कैंसर के नए मामलों का बोझ आने वाले वर्षों में बढ़ने का अनुमान है। कैंसर को लेकर पेश किए गए राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। बदलती जीवनशैली, तंबाकू, शराब, मोटापा, प्रदूषण और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारक कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले पाए गए हैं। 
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कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
कैंसर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। साल-दर-साल इस जानलेवा बीमारी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की कैंसर पर हालिया ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर साल कैंसर के अनुमानित 2.06 करोड़ नए मामले सामने आ रहे हैं और लगभग 1 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है। बच्चों से लेकर वयस्क और बुजुर्गों तक सभी इस बीमारी का शिकार देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस गति से ये बीमारी बढ़ रही है और जिस तरह से इसका स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है उसे देखते हुए सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है।

कैंसर अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है। खराब जीवनशैली, तंबाकू-शराब का सेवन, बढ़ता प्रदूषण, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और खान-पान की गड़बड़ी जैसे कई कारक शरीर में कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले पाए गए हैं। चिंता की बात यह है कि कई कैंसर प्रकार के कैंसर की शुरुआत में पहचान नहीं हो पाती है, जिससे बीमारी बढ़ती जाती है और इसके गंभीर स्थिति में पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। नतीजा यह होता है कि बीमारी का पता अक्सर तब चलता है, जब इलाज ज्यादा जटिल हो चुका होता है।

देश में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच हालिया रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है। बड़ी आबादी वाले इस राज्य में कैंसर के नए मरीजों की संख्या देश के दूसरे राज्यों की तुलना में अधिक देखी गई है।
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कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Adobe stock photos
आईसीएमआर के कैंसर के आंकड़े
 
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने 2026 के राज्यवार आंकड़े और अनुमान जारी किए हैं। इसके अनुसार, अभी देशभर में हर साल करीब 15.6 लाख नए मामले सामने आते हैं। जिस गति से कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है ऐसे में साल 2030 तक ये आंकड़ा बढ़कर 17.5 लाख होने की आशंका जताई गई है। मतलब, देश में कैंसर का बोझ आने वाले वर्षों में और बढ़ने का अनुमान है। 
 
  • सबसे ज्यादा नए अनुमानित कैंसर के मामले उत्तर प्रदेश में (2,31,671) हैं। 
  • इसके बाद महाराष्ट्र में 1,33,825 और पश्चिम बंगाल में 1,20,444 मामले अनुमानित हैं। 
  • साल 2030 तक उत्तर प्रदेश में यह संख्या बढ़कर करीब 2,54,411, महाराष्ट्र में 1,47,116 और पश्चिम बंगाल में करीब 1,30,000 तक पहुंचने की आशंका है। 
  • दिल्ली में अगले चार साल में सबसे तेज 7.1 फीसदी की रफ्तार से कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
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कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock
उत्तर प्रदेश में कैंसर का खतरा, तंबाकू सबसे बड़ी वजह

उत्तर प्रदेश में 2026 में 2.63 लाख वयस्कों में नए कैंसर मामले अनुमानित हैं। वहीं, पंजाब में 2026 में 23,257 और 2030 में 23,724 वयस्कों कैंसर के मामले आ सकते हैं। पुरुषों में तंबाकू सेवन 12.9% है। तंबाकू और कम जांच बार-बार बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है। 
 
  • असम की रिपोर्ट के अनुसार वहां 51.8 फीसदी वयस्क पुरुष और 22.1 फीसदी महिलाएं तंबाकू का इस्तेमाल करती हैं।
  • पुरुषों में तंबाकू से जुड़े कैंसर का हिस्सा कई जिलों में 60 फीसदी से ज्यादा है।
  • 30 से 49 साल की महिलाओं में कैंसर की जांच कराने वाली महिलाओं का हिस्सा सिर्फ 0.2 फीसदी है।
  • मेघालय में भी तस्वीर चिंताजनक है। 2026 में 3,109 नए मामले अनुमानित हैं, जो 2030 में बढ़कर 3,206 हो सकते हैं। 
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मुंह के कैंसर के मामले - फोटो : Adobe stock photos
पुरुषों में मुंह के कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सर्वाधिक

यूपी में पुरुषों में मुंह का कैंसर के 36.3% और महिलाओं में स्तन कैंसर 36.3% के मामले सबसे ज्यादा है। राज्य के जिन कैंसर रजिस्ट्री क्षेत्रों का आंकड़ा लिया गया, वहां पुरुषों में 55.9% से 66.9% कैंसर स्थल तंबाकू से जुड़े पाए गए। 15 वर्ष से अधिक उम्र के 44.1% पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं। वहीं, दिल्ली में  2026 में 26,898 और 2030 में 28,800 वयस्क नए मामले अनुमानित हैं। यानी चार साल में करीब 7.1% की बढ़ोतरी हो सकती।




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स्रोत:
State-wise forecasting of cancer incidence in India using a moderated exponential regression model incorporating healthcare system determinants


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। ये रिपोर्ट आज के समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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