फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

H1N1 Risk: पहले भी फैलता रहा है स्वाइन फ्लू, फिर इस बार इतनी चिंता क्यों? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Mon, 24 Aug 2026 03:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईसीएमआर के अनुसार भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। मामलों में बढ़ोतरी मौसमी संक्रमण और वायरस के तेजी से फैलने के कारण हो रही है। हालांकि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को संक्रमण से बचाव को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है
विज्ञापन
1 of 4
स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
एच1एन1 फ्लू को लेकर राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में चिंता बढ़ती जा रही है। बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में बुखार-खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल में पहुंच रहे हैं। दिल्ली में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के करीब 1800  मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कर्नाटक में यह आंकड़ा 4,000 के पार पहुंच गया है। मुंबई, चेन्नई और केरल के कुछ हिस्सों में भी फ्लू के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों के बीच लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या इस बार स्वाइन फ्लू का कोई नया वैरिएंट फैल रहा है जिसके कारण इतनी अफरा-तफरी है?

स्वाइन फ्लू से देश में कुछ लोगों की मौतें भी रिपोर्ट की गई है। गौरतलब है कि बच्चों-बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में इस संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा रहता है। इस बार चूंकि रोगियों की संख्या ज्यादा है इसलिए चिंता बढ़ रही है। 

स्वाइन फ्लू कोई नया वायरस नहीं है, ये पहले भी फैलता रहा है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि इस बार स्वाइन फ्लू के खतरनाक रूप लेने के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार है, कहीं कोई नया वैरिएंट तो नहीं आ गया है?
विज्ञापन

2 of 4
H1N1 पर बड़ा अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
क्या स्वाइन फ्लू का आ गया है कोई नया स्ट्रेन?

स्वाइन फ्लू को लेकर इन्हीं सवालों  का जवाब देते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी (आईसीएमआर) ने स्थिति साफ कर दी है। आईसीएमआर ने बताया, भारत में इस समय फैल रहा इंफ्लूएंजा-ए (एच1एन1) कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस 2025 से ही देश में सर्कुलेशन में है। इसलिए सिर्फ मामलों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वायरस अचानक ज्यादा खतरनाक हो गया है। हालांकि सवाल ये है कि फिर संक्रमण इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है? 
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एच1एन1 मौसमी फ्लू का हिस्सा है और मौसम में बदलाव खासकर मानसून के दौरान इसके फैलने की गतिविधि बढ़ जाती है। ज्यादातर मामलों में मौसमी फ्लू अपने आप ठीक हो जाता है। उचित आराम और सही देखभाल से अधिकांश मरीज स्वस्थ हो जाते हैं।
  • लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 4
स्वाइन फ्लू का प्रकोप - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

 वैज्ञानिकों ने वायरस की बनावट और उसके बदलावों का अध्ययन करने के बाद इसे एक खास समूह में रखा है। मेडिकल भाषा में इसे क्लेड और सबक्लेड कहा जाता है। आसान शब्दों में समझें तो यह वायरस की ऐसी वैज्ञानिक श्रेणी है, जिससे पता चलता है कि वायरस का मौजूदा रूप पहले से मौजूद वायरस के किस समूह से संबंधित है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि राहत की बात यह है कि भारत में फैल रहे एच1एन वायरस का मौजूदा रूप पर फ्लू वैक्सीन को असरदार पाया गया है।
  • मेडिकल सूत्रों से पता चलता है कि एच1एन का कोई नया स्ट्रेन नहीं है जिसकी वजह से मामलों में तेजी आई हो।
  • नियमित निगरानी के जरिए स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और जरूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

4 of 4
श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए मास्क - फोटो : Adobe Stock
संक्रमण से बचाव के लिए कोविड जैसे उपाय 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के दौर में हम सभी श्वसन वायरस से मजबूती से मुकाबला करना सीख चुके हैं,  इस संक्रमण में भी उसी तरह से सुरक्षात्मक उपाय किए जाने की जरूरत है। 
 
  • फ्लू जैसी बीमारी में अचानक बुखार, सूखी खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द के साथ बहुत ज्यादा कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके लक्षण कोविड की ही तरह हो सकते हैं।
  • कोरोना से बचाव के लिए जिस तरह से मास्क, हाथों की स्वच्छता और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय किए गए थे, स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए भी इन्हीं की जरूरत है। 
  • फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर ज्यादा घबराने या चिंता करने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सी सावधानी बड़ी मुश्किलों को टालने वाली हो सकती है।





--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें