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क्या नाले के गंदे पानी से भी फैल सकता है कोरोना वायरस? आईआईटी के शोध में हुआ खुलासा

Tue, 09 Jun 2020 05:45 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में यह तो शुरुआत से ही स्पष्ट हो चुका है कि यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ्य व्यक्ति में फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकले ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है। इसके अलावा अगर कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकले ये डॉपलेट्स टेबल, कुर्सी, कपड़े, स्टील, हैंडल, वॉश बेसिन आदि सतहों पर पड़े हों तो ऐसी सारी सतहों के संपर्क में आने पर कोरोना संक्रमण का खतरा रहता है। लेकिन क्या आपके मन में कभी ये सवाल उठा कि गंदे पानी में भी कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है? जैसे कि नाले या सीवेज के गंदे पानी में? इस संक्रामक बीमारी के बारे में गुजरात के गांधीनगर स्थित आईआईटी यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने एक शोध अध्ययन किया है। 
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सीवेज
आईआईटी ने अपने शोध में खुलासा किया है कि नाली के गंदे पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में जो रिजल्ट पाया है, वह खासकर सफाईकर्मियों के लिए खतरे की संभावना बढ़ाता है। सफाईकर्मियों के साथ-साथ अन्य जो लोग भी नाले की सफाई करते हैं, उन्हें अपना बचाव करने की जरूरत है।
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Sewage Treatment Plant(File Photo)
  • आईआईटी गांधीनगर के शोधकर्ताओं ने सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की उपस्थिति का पता लगाया है। इस अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने अहमदाबाद के एक नाले से बिना ट्रीटमेंट का थोड़ा पानी जमा किया और उसमें वायरस की उपस्थिति को लेकर अध्ययन किया। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • शोधकर्ताओं ने बताया कि कोराना वायरस प्रसार को लेकर शोध किया जा रहा था। उनका कहना है कि देशभर के हॉटस्पॉट, कंटेनमेंट जोन में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन या सामुदायिक प्रसार को लेकर भी यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं संक्रमण फैलने का एक कारण सीवेज का गंदा पानी तो नहीं है। 
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Research
  • मालूम हो कि इससे पहले अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड जैसे देशों में भी पानी के जरिए कोरोना संक्रमण के प्रसार की सूचनाएं सामने आई थीं। बीते अप्रैल में गांधीनगर आईआईटी भी ऐसे ही एक वैश्विक शोध का हिस्सा बना, जिसमें सीवेज के पानी में कोरोना वायरस प्रसार के बारे में पता लगाया जा रहा था। इस शोध में 51 अन्य  विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थान भी शामिल हुए थे। 
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Research
  • खबरों के मुताबिक, आईआईटी गांधीनगर के प्रो. मनीष कुमार ने कहा है कि सीवेज का पानी वायरस की पहचान का मुख्य स्रोत हो सकता है, क्योंकि कोरोना संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखे या नहीं, लेकिन वह मल या मूत्र त्याग करेगा तो वह सीवेज के गंदे पानी में मिल जाएगा और ऐसे में कोरोना की मौजूदगी की संभावना बनती है। 
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
क्या पानी में संक्रामक नहीं है कोरोना?
  • इस अध्ययन में गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने आईआईटी टीम की मदद की। आठ और 27 मई को सीवेज के पानी का नमूना लिया गया। शोधकर्ताओं को इस अध्ययन में यह पता चला कि पानी में कोविड-19 संक्रामक नहीं है। पानी में वायरस की मौजूदगी का तापमान से भी कोई कनेक्शन भी नहीं है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
और गहन अध्ययन की जरूरत
  • प्रो. मनीष कहते हैं कि मौजूदा अध्ययन से कोरोना संक्रमण के फैलने का पता नहीं लगाया जा सकता। गंदे पानी के सैंपल से जिंदा कोरोना वायरस को नहीं पकड़ा जा सकता, लेकिन जीन सीक्वेंसिंग के जरिए पता लगाया जा सकता है कि कोरोना का जेनेटिक मटेरियल पानी में किस हद तक मौजूद है। स्पष्ट है कि इसके लिए गहन शोध अध्ययन की जरूरत है।
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