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बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों से संक्रमण फैलने को लेकर डब्ल्यूएचओ ने कही ये बड़ी बात

Tue, 09 Jun 2020 03:03 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया के कई देशों में चिंताजनक स्थिति है। इससे बचाव के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन लगाया गया, जिससे काफी हद तक नियंत्रण भी हुआ। लेकिन अब भारत समेत कई देशों में लॉकडाउन में ढील दी जा रही है और कोरोना संक्रमण के मामलों का बढ़ना पहले की ही तरह जारी है। ऐसे में मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और हाइजीन मेंटेन करने की सलाह दी जा रही है। पिछले दिनों दुनियाभर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों से संक्रमण फैलने को चुनौती माना। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस संबंध में अलग राय स्पष्ट की है। 
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कोरोना संक्रमण - फोटो : PTI
 विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना संक्रमण फैलने के तीन रास्ते हो सकते हैं।
  • सिम्प्टोमैटिक- वो लोग जिनमें कोरोना के लक्षण देखने को मिले और फिर उन्होंने दूसरों को इसे फैलाया। ये लोग लक्षण दिखने के पहले तीन दिन में लोगों को कोरोना फैला सकते हैं।
  • प्री सिम्प्टोमैटिक - वायरस के संक्रणम फैलाने और लक्षण दिखने के बीच भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। इसकी समय सीमा 14 दिन की होती है, जो इस वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड भी है। इनमें सीधे तौर पर कोरोना के लक्षण नहीं दिखते। लेकिन हल्का बुखार, बदन दर्द जैसे लक्षण शुरुआती दिनों में दिखते हैं।
  • एसिम्प्टोमैटिक - जिनमें किसी तरह के लक्षण नहीं होते लेकिन वो कोरोना पॉजिटिव होते हैं और संक्रमण फैला सकते है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है, एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों से दूसरों को संक्रमण फैलने के मामले काफी दुर्लभ हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, ऐसे मामले बेहद कम हैं। शोधकर्ता लगातार बिना लक्षण वाले मरीजों से संक्रमण फैलने की चुनौती की ओर इशारा कर रहे थे। ऐसी चर्चाओं के जोर पकड़ने के बाद सोमवार रात विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस पर अपनी राय रखी। 

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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
  • कई बार कोरोना के मरीजों, खासकर युवाओं और दूसरे स्वस्थ लोगों में ऐसे देखा जाता है कि संक्रमण के बावजूद उनमें लक्षण नहीं दिखाई देते हैं या फिर होते भी हैं तो बेहद हल्के लक्षण होते हैं। दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का जो ट्रेंड है यानी जिस तरह से कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, डब्ल्यूएचओ(WHO) का कहना है कि संक्रमण फैलने का मुख्य कारण एसिम्प्टोमैटिक मरीज नहीं हैं। 
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संक्रमण मूलत: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है - फोटो : PTI
  • कोरोना वायरस का संक्रमण मूलत: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। किसी व्यक्ति के खांसने, छींकने के दौरान उनके ड्रॉपलेट्स के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण फैलता है। ये ड्रॉपलेट्स किसी सतह पर लगे हों तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है और हो सकता है कि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण न भी दिखें। डब्ल्यूएचओ की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन भी ऐसा मानती हैं, लेकिन उनका कहना है कि दुनियाभर में जिस तरह मामले बढ़ रहे हैं उसकी वजह ये एसिम्प्टोमैटिक मरीज नहीं हैं।
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Coronavirus - फोटो : Pexels
  • डॉ. मारिया वेन ने कहा था कि डब्ल्यूएचओ के पास अबतक का जो आंकड़ा है वह बताता है कि ऐसे मामले दुर्लभ हैं। उनका कहना है कि सरकारों को अपना लक्ष्य संक्रमितों का पता लगाने और उन्हें आइसोलेट मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों पर भी नजर रखने की जरूरत है। हालांकि कुछ शोधों में कहा गया है कि कई नर्सिंग होम, अस्पताल या अन्य जगहों पर एसिम्प्टोमैटिक मरीजों से संक्रमण फैला है।
 
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कोरोना संक्रमण - फोटो : Pixabay
  • मालूम हो कि शुुरुआत में एक से तीन दिन में प्रारंभिक लक्षण दिखने की बात कही जा रही थी। फिर पांच से सात दिन और 14 दिनों के अंदर संक्रमण के लक्षण नजर आने की बात कही गई। लेकिन बहुत सारे कोरोना मरीजों में लक्षण नहीं नजर आने की बात भी सामने आई, जो कि गंभीर चिंता का विषय बना रहा। 
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कोरोना संक्रमण - फोटो : PTI
  • लक्षण वाले मरीजों से तो परहेज किया जा सकता है, लेकिन जिनमें लक्षण ही न दिखें तो उनकी कोरोना जांच के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। पिछले दिनों दिल्ली के ही एक मामले में घर के बुजुर्ग कोरोना से पीड़ित थे, लेकिन उनमें लक्षण नहीं थे। उनसे जब घर के एक युवा को संक्रमण हुआ तो लक्षण दिखते ही पूरे परिवार की जांच काराई गई और फिर पता चला कि बुजुर्ग से ही घर के अन्य सदस्यों में कोरोना संक्रमण फैला। हालांकि ऐसे मामले बहुत कम हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी यही स्पष्ट किया है। 
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