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ओवुलेशन से जुड़ी इन बातों को न करें नजरअंदाज, ऐसे लगाएं ओवुलेशन दिन का पूर्वानुमान  

Tue, 18 May 2021 12:50 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्वानुमान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है - फोटो : social media

Medically Reviewed by Dr. kshitij Murdia
डॉ क्षितिज मुर्डिया
स्त्री रोग विशेषज्ञ, को फाउंडर- इंदिरा आईवीएफ
अनुभव- 10 वर्ष

 ओवुलेशन प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा एक ऐसा विषय है जिसके बारे में कई मिथक, असत्यापित जानकारी और बातें कही, बोली और सुनी जाती हैं। ओवुलेशन के अलावा भी कई कारक हैं जो प्रेग्नेंट होने में मदद कर सकते हैं लेकिन सफल गर्भाधान के लिए यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपनी फर्टाइल विंडो के बारे में जानकारी न होने पर लोगों के लिए ओवुलेशन के दिनों को याद रखना या उनके बारे में पूर्वानुमान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगली स्लाइड्स से जानिए ओवुलेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

 

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अंडाशय से फैलोपियन ट्यूब में छोड़ा जाता है - फोटो : amar ujala bureau

ओवुलेशन क्या है?
ओवुलेशन प्रजनन साइकिल का हिस्सा है, इसमें अंडे को प्रमुख फॉलिकल के अंडाशय से फैलोपियन ट्यूब में छोड़ा जाता है। जब अंडे को एक शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज किया जाता है, तो फैलोपियन ट्यूब में एक भ्रूण बनता है जो बाद में गर्भाशय तक जाता है और आगे भ्रूण में विकसित होता है। जब अंडा शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज नहीं होता, वह विघटित हो जाता है और मासिक धर्म के दौरान गर्भाशय के अस्तर के साथ बहा दिया जाता है।

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सबसे फर्टाइल दिन उससे दो-तीन दिन पहले होंगे - फोटो : सोशल मीडिया

ओवुलेशन दिन को कैसे याद रखें?
आमतौर पर हर मासिक धर्म की शुरुआत से लगभग 13-15 दिन पहले ओवुलेशन होता है। लेकिन मासिक धर्म की तरह, ओवुलेशन का समय प्रत्येक व्यक्ति में साइकिल के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। यदि एक औसत मासिक धर्म चक्र 28 दिनों का है, तो ओवुलेशन के लिए सबसे सही दिन 14 वें दिन के आसपास होगा, और सबसे फर्टाइल दिन उससे दो-तीन दिन पहले होंगे।

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योनि स्राव की मात्रा बढ़ जाती है - फोटो : pixabay
ओवुलेशन के लक्षण
ओवुलेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कई महिलाएं इन लक्षणों का अनुभव कर सकती हैं- हल्का ओवुलेशन दर्द, स्पॉटिंग, कामेच्छा में वृद्धि, स्तनों का फूलना, ब्लोटिंग और योनि स्राव में बदलाव (अंडे की सफेदी की तरह साफ और फिसलन) और योनि स्राव की मात्रा बढ़ जाती है।
 
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ओवुलेशन को ट्रैक किया जा सकता है - फोटो : social media
इन तरीकों से भी किया जा सकता है ट्रैक
यदि लक्षणों के आधार पर आप अपना ओवुलेशन का समय पता नहीं लगा पा रहे हैं तब आप और भी कई तरीके अपना सकते हैं। जिसमें ट्रांसवेजिनल सोनोग्राफी, बेसल बॉडी टेम्परेचर, ओवुलेशन प्रेडिक्शन किट, ट्रैकिंग कैलेंडर बनाकर, ओवुलेशन इंडिकेटर एप्लिकेशन आदि द्वारा भी ओवुलेशन को ट्रैक किया जा सकता है।
 
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महिला के शरीर में शुक्राणु तीन दिनों तक सक्रिय रह सकते हैं - फोटो : Pixabay
फर्टाइल विंडो’ क्या है और यह ओवुलेशन से किस तरह से जुड़ा हुआ है?
'फर्टाइल विंडो’ प्रजनन चक्र के दौरान का वो समय है जब गर्भाधान की संभावना अधिक होती है। जबकि महिला के शरीर में शुक्राणु तीन दिनों तक सक्रिय रह सकते हैं, लेकिन एक अंडा लगभग 24 घंटे तक ही जीवित रहता है। इसलिए गर्भधारण के लिए प्रयास करने का सबसे अच्छा समय ओवुलेशन से तीन से चार दिन पहले से लेकर ओवुलेशन के बाद दो दिनों तक होता है।
 
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35 के बाद उसमें तेजी से गिरावट आ सकती है - फोटो : सोशल मीडिया
40 की उम्र के बाद ओवुलेशन और गर्भधारण
महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और मात्रा 30 की उम्र के बाद कम होने लगती है और 35 के बाद उसमें तेजी से गिरावट आ सकती है, लेकिन विभिन्न एआरटी विधियों के माध्यम से माँ बन पाना संभव है। ओवुलेशन की स्थिरता और बांझपन का खतरा 40 की उम्र के बाद प्रभावित हो सकता है। एग फ्रीजिंग, क्रायोप्रिजर्वेशन, भ्रूण संरक्षण पीजीटीए, आईवीएफ और आईयूआई आदि कुछ ऐसे तरीके हैं जो 40 की उम्र में भी एक सफल गर्भाधान के लिए डॉक्टरों और भ्रूणविज्ञानियों के चिकित्सकीय मार्गदर्शन में चुने जा सकते हैं।
 
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भ्रूणविज्ञानियों से परामर्श करने की सलाह हमेशा दी जाती है - फोटो : social media
अन्य कारकों पर भी दें ध्यान 
गर्भवती होना या सफल गर्भाधान प्राप्त करना यह बातें सही समय के अलावा कई अन्य कारकों पर भी निर्भर होती हैं। विभिन्न प्रकार के शारीरिक, प्रजनन और स्वास्थ्य कारक हैं जो गर्भावस्था को प्रभावित कर सकते हैं। गर्भावस्था के लिए सफल योजना बनाने के लिए अपने डॉक्टरों और भ्रूणविज्ञानियों से परामर्श करने की सलाह हमेशा दी जाती है।

नोट- यह लेख इंदिरा आईवीएफ के को -फाउंडर डॉ क्षितिज मुर्डिया से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर डॉ क्षितिज मुर्डिया पिछले 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। वे अब तक 12.000 से अधिक आईवीएफ प्रक्रियाओं का हिस्सा रह चुके हैं। 

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 



 
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