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आयुष मंत्रालय संग अमर उजाला की पहल: विशेषज्ञ से जानिए स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद में बताए गए मूलमंत्र

Thu, 17 Jun 2021 08:17 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आयुर्वेद और हमारा स्वास्थ्य - फोटो : Social media
कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने सभी को एक बात स्पष्ट रूप से समझा दिया है- सेहत है संग तो जीत सकते हैं हर जंग। विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य को एक झटके में ठीक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। आयुर्वेद वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं के निवारण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा है। कोरोना के समय में वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में लोगों ने आयुर्वेद को सहारा बनाकर लाभ प्राप्त किया है।
आयुर्वेद को सिर्फ भारत तक में ही सीमित करके देखना न्यायसंगत नहीं है। दुनिया के कई देशों ने भी आयुर्वेद की शक्ति को स्वीकार कर इसे प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है। आयुर्वेद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर एक पहल की है। इसी क्रम में गुरुवार को आयोजित वेबिनार में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने आयुर्वेद और सेहत से जुड़े तमाम विषयों पर प्रकाश डाला।
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आयुर्वेद में शरीर और मन को स्व्स्थ रखने पर दिया जाता है ध्यान - फोटो : Pixels
जानिए स्वास्थ्य का असली मतलब
स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए प्रो. संजीव कहते हैं कि सिर्फ बीमारी न होने का मतलब यह नहीं है कि हम स्वस्थ हैं। स्वस्थ उसे माना जाता है जिसका शरीर, मन और सामाजिक सरोकार स्वस्थ हो। आयुर्वेद में इसी तरह की स्वास्थ्य की कल्पना की गई है। हमारे स्वास्थ्य के खराब होने का मुख्य कारण प्रज्ञापराध माना जाता है। प्रज्ञापराध ऐसे कार्यों को कहा जाता है जिन्हें हम जानते हैं कि गलत हैं, फिर भी करते हैं। ऐसी चीजें शरीर को अस्वस्थ कर सकती हैं।
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आयुर्वेद और सेहत का ख्याल - फोटो : Social media
स्वास्थ्य के मूल सिद्धांत
आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के कुछ मूल सिद्धांत हैं जिनका सभी लोगों को पालन करना चाहिए। आयुर्वेद में आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य को स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। आहार में भोजन को स्वस्थ और पौष्टिक रखने, पूरी नींद लेने या नींद के समय के सही होने पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है। भोजन या नींद में किसी प्रकार की कमी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। इसी तरह आयुर्वेद में ब्रह्मचर्य पर भी जोर दिया गया है। ब्रह्मचर्य का मतलब सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक बर्ताव कर स्वास्थ्य को सही रखना होता है।
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आयुर्वेद में कोरोना का इलाज - फोटो : Social media
आयु्र्वेद और कोरोना
प्रो. संजीव कहते हैं कोरोना से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लोगों को सिर्फ सावधान रहना चाहिए। कोरोना के संबंध में आयुष मंत्रालय समय-समय पर दिशानिर्देश जारी करता रहा है, इनका पालन करके संक्रमण से आसानी से सुरक्षित रह सकते हैं। माइल्ड कोरोना के लक्षणों के साथ पोस्ट कोविड की समस्याओं को ठीक करने में आयुर्वेद काफी मददगार साबित हो सकता है। कोरोना के लक्षणों के अलावा पोस्ट कोविड को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कई सारी औषधियां हैं जिनसे लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 

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नोट: यह लेख राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।  ।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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