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डॉक्टर ने बताया: मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बच्चों को कैसे बचाएं, कौन से लक्षण हैं तो हो जाएं सावधान?

Thu, 03 Sep 2026 08:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मच्छरों से फैलने वाली डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां बच्चों के लिए परेशानी बढ़ा सकती हैं। घर में जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है। नियमित सफाई, पानी जमा न होने देना, जाली, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े से बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
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symptoms of dengue - फोटो : AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू के साथ मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा भी देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से मच्छरों से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दे रहे हैं।

देश में हर साल अगस्त से अक्तूबर के महीने में डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लग जाती है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त के आखिरी हफ्ते तक राजधानी में डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगस्त में ही डेंगू के 51 मामले सामने आए। यह इस साल किसी एक महीने में डेंगू के मामलों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अप्रैल में 52 मामले सामने आए थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं वैसे तो ये बीमारियां किसी भी उम्र वाले व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती हैं, पर बच्चों को लेकर सावधानी और ज्यादा जरूरी है। डेंगू-मलेरिया जैसी कुछ मच्छर जनित बीमारियां बच्चों में गंभीर रूप ले सकती हैं। 
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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
बच्चों में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां

अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने मलेरिया रोग और इसके खतरों को लेकर अलर्ट किया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के लिए मलेरिया के साथ डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा भी अधिक होता है।
 
  • डेंगू में ज्यादातर बच्चे ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर डेंगू विकसित हो सकता है। 
  • कई बच्चों में तेज बुखार के साथ पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस लेने, मसूड़ों-शौच से खून आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं जिन्हें आपात स्थिति माना जाता है। 

डॉक्टर कहते हैं, मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों से बच्चों और अन्य लोगों को बचाने के लिए केवल मच्छर काटने से बचाना नहीं, बल्कि मच्छर को पनपने से रोकना बहुत जरूरी है। अगस्त से अक्तूबर के महीनों में इसपर और गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
बच्चों में डेंगू-मलेरिया का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी माता-पिता को बच्चों को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए सावधान रहना चाहिए। 
 
  • डेंगू संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर घर के आसपास पानी जमा होने वाले कंटेनरों में पनप सकते हैं। ये दिन और रात दोनों समय काटते हैं।
  • मलेरिया  मादा एनाफिलीस मच्छरों से फैलता है। इसमें तेज बुखार के साथ सिरदर्द और ठंड लगने की दिक्कत होती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया के गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक देखा जाता है।
  • चिकनगुनिया में अचानक बुखार और जोड़ों का दर्द की समस्या होती है।

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मच्छरों से करें बचाव - फोटो : Freepik.com
मच्छर जनित बीमारियों से बचाव का तरीका क्या है?

डॉक्टर कहते हैं, मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए दो बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 
 
  • पहला- मच्छर को पैदा होने से रोकना और बच्चे को मच्छर काटने से बचाना।
  • इसके लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें। फूलदान, बाथरूम, सिंक के नीचे या ऐसे स्थान जहां पानी या नमी बनी रहती है, वहां भी मच्छर मौजूद हो सकते हैं। 
  • खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाएं, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं और मच्छरों को काटने से बचाने के लिए मच्छर भगाने वाले उपाय करें। 
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डेंगू से बचाव के उपाय - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर कहते हैं, बच्चों में मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। इन महीनों में बच्चों में बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपके इलाके में पहले से डेंगू या मलेरिया का संक्रमण देखा जा रहा हो तो और सावधानी जरूरी है। 

डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर दाने हो सकते हैं, ऐसे लक्षण दिखते ही बच्चों को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। मलेरिया में बुखार के साथ ठंड लगने  की समस्या हो सकती है। इस तरह के संकेतों को हल्के में लेकर घर पर ही खुद से इलाज करना भारी पड़ सकता है।  



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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