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Hepatitis: कैसे होती है लिवर की बीमारी? जानें हेपेटाइटिस का इलाज और बचाव के उपाय

Thu, 28 Jul 2022 08:30 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हेपेटाइटिस का इलाज और बचाव के उपाय - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Tarun Bhardwaj

डॉ. तरुण भारद्वाज
डीएम, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट
भोपाल


स्वस्थ शरीर के लिए लिवर का स्वस्थ रहना जरूरी होता है। लिवर पाचन तंत्र के लिए शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह शरीर के अधिकांश रासायनिक स्तरों को नियंत्रित करने के साथ ही पित्त का उत्पादन करता है। इसके अलावा अपशिष्ट उत्पादों को शरीर से बाहर निकालने का काम भी लिवर करता है। ऐसे में लिवर को होने वाली किसी भी समस्या का प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ सकता है। लिवर की समस्या कई तरह की बीमारियों का कारण बनती है। इसमें हेपेटाइटिस ऐसी ही गंभीर बीमारी है जो लिवर में सूजन के कारण होती है। लिवर में सूजन संक्रमण की वजह संक्रमण हो सकता है। हेपेटाइटिस का संक्रमण दो तरह का हो सकता है, एक्यूट हेपेटाइटिस (अल्पकालीन) और क्रॉनिक हेपेटाइटिस (दीर्घकालीन)। हेपेटाइटिस के लक्षणों को अनदेखा करना जान का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि लिवर की बीमारी किन कारणों से होती है? चलिए जानते हैं हेपेटाइटिस से ग्रसित होने की वजह क्या है और इससे बचने के उपाय या हेपेटाइटिस के इलाज के बारे में जानें।
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संक्रमित निडिल से हेपेटराइटिस का खतरा - फोटो : Pixabay
किन कारणों से होता है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस वायरस इन्फेक्शन से होने वाली बीमारी है, जो जानलेवा इंफेक्शन होता है। हालांकि ये इंफेक्शन कैसे होता है, ये जानकर आप हेपेटाइटिस से बच सकते हैं।

वायरल इंफेक्शन

हेपेटाइटिस से ग्रसित होने के कारणों में पहली वजह वायरल इंफेक्शन है, जो निम्न तरीको से शरीर में प्रवेश करता है-
  • दूषित खाने और दूषित पानी के सेवन से
  • संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने से
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टैटू बनवाते समय उपकरण संक्रमण फैला सकते हैं - फोटो : अमर उजाला
  • असुरक्षित यौन संबंधों से
  • नशे के इंजेक्शन लगाने पर
  • टैटू या बॉडी पियरसिंग से
  • बिना स्टरलाइज की गई निडिल्स से
  • संक्रमित गर्भवती से उसके बच्चे को

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शराब लिवर के लिए नुकसानदायक - फोटो : अमर उजाला
ऑटोइम्यून स्थितियां

इसे नाॅन वायरल हेपेटाइटिस करते हैं, जिसमें शरीर के इम्यून सेल से पता चलता है कि लीवर की सेल्स डैमेज हो रही हैं।

शराब का सेवन

शराब पीने से लीवर पर सीधा असर पड़ता है। अधिक शराब के सेवन से हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ सकता है।
 
दवाइयों के साइड इफेक्ट्स

दवाएं भी हेपेटाइटिस की समस्या होने का एक कारण है। कुछ दवाओं के ज्यादा सेवन करने से लिवर सेल्स में सूजन आ जाती है और हेपेटाइटिस का जोखिम बढ़ जाता है। 
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लिवर की सेहत के लिए इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय

हेपेटाइटिस बी और सी से बचाव और रोकथाम के लिए जरूरी है कि संक्रमण को फैलने से रोकने का प्रयास किया जाए। बच्चों को हेपेटाइटिस के खतरे से बचाने के लिए वैक्सीन दी जाती है। इसके लिए 18 साल के उम्र तक या वयस्कों को 6 से 12 महीने में वैक्सीन के तीन डोज लेने चाहिए। साथ ही खुद को हेपेटाइटिस की समस्या से दूर रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-
  • अपने रेजर, टूथब्रश और सुई को दूसरों से शेयर न करें।
  • ये सुनिश्चित करें कि टैटू बनवाते समय सुरक्षित उपकरणों का उपयोग हो रहा हो।
  • कान छेदते समय उपकरण इंफेक्शन फ्री हो।
  • एक बार इस्तेमाल हुई सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल न करें।
  • गर्भावस्था के दौरान मां डॉक्टर की सलाह से पूरा चेकअप कराएं।
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हेपेटाइटिस होने पर ये टेस्ट करा सकते हैं चिकित्सक - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस का इलाज

अगर हेपेटाइटिस के लक्षण महसूस हो तो सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लें। चिकित्सक हेपेटाइटिस की संभावना होने पर चार तरह के टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • पेट का अल्ट्रासाउंड
  • ऑटोइम्यून ब्लड मार्कर टेस्ट
  • लिवर फंक्शन टेस्ट
  • लिवर बायोप्सी
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क्रॉनिक हेपेटाइटिस होने पर दवाओं से हो सकते हैं स्वस्थ - फोटो : pixabay
इन टेस्ट के आधार चिकित्सकीय इलाज होता है। अगर एक्यूट हेपेटाइटिस से ग्रसित हैं तो कुछ हफ्तों में ही लक्षण कम होने लगते हैं और मरीज को राहत मिल सकती है। लेकिन अगर क्रॉनिक हेपेटाइटिस हो जाए तो दवाएं लेने की जरूरत होती है। वहीं गंभीर स्थिति में लिवर खराब होने पर लिवर ट्रांसप्लांटेशन कराने की जरूरत भी पड़ सकती है। 
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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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