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Heart Diseases: मम्मी-पापा को रही है दिल की बीमारी? डॉक्टर से जानिए आप कैसे रहें इससे सुरक्षित

Fri, 07 Nov 2025 07:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि दिल की बीमारियों से आज के समय में किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है इसलिए अगर बच्चों को शुरुआती उम्र से ही हेल्दी लाइफस्टाइल सिखाई जाए तो भविष्य में इस बीमारी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। 
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हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
दिल की बीमारियां मौजूदा समय में बहुत आम हो गई हैं। अब सिर्फ उम्रदराज लोग ही नहीं, कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर्स की मानें तो खराब लाइफस्टाइल जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम न करना और खान-पान की गड़बड़ी जैसे फास्ट फूड, जंक फूड और मीठी चीजों के अधिक सेवन ने इन बीमारियों के खतरे को बढ़ा दिया है।

डॉक्टर्स बताते हैं कि बच्चों का मोबाइल या टीवी स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बीत रहा है, जिसके कारण उनकी शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। इसके अलावा आहार की गड़बड़ी भी दिल पर सीधा असर डाल रही है। यही कारण है कि समय के साथ हृदय की समस्याओं का खतरा और भी बढ़ गया है।

विशषज्ञों के अनुसार, अगर परिवार में, विशेषतौर पर माता-पिता में से किसी को पहले से ही दिल की बीमारी रही है तो इससे आपमें भी इसका खतरा बढ़ जाता है। हालांकि अच्छी बात ये है कि समय रहते अपने जोखिमों को जानते हुए अगर आप बचाव के उपाय शुरू कर देते हैं तो इस जानलेवा समस्या से बचाव किया जा सकता है।
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कम उम्र में हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों के बढ़ते मामले

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि दिल की बीमारियों से आज के समय में किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है इसलिए अगर बच्चों को शुरुआती उम्र से ही हेल्दी लाइफस्टाइल सिखाई जाए तो भविष्य में इस बीमारी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए रोजाना 30 मिनट व्यायाम, पौष्टिक भोजन, नींद का सही समय और तनाव-मुक्त दिनचर्या की आदत बनाएं।
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हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

हृदय रोगों के खतरे को समझने के लिए किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों के परिवार में किसी को 55 की उम्र से पहले हृदय रोग हो चुका है, उनमें हृदय रोगों का खतरा अधिक हो सकता है। अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ कार्डियोलॉजी डॉ. रवि सिन्हा बताते हैं, आनुवांशिकता का हृदय रोगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। जन्मजात हृदय दोष और कार्डियोमायोपैथी जैसे रोग इसका सबसे आम उदाहरण हैं। 

जिन लोगों में इसका जोखिम अधिक हो उन्हें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

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हृदय रोगों की जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com
नियमित रूप से हृदय की जांच कराएं 
  • अगर परिवार में किसी को हृदय रोग है, तो ऐसे में 25 वर्ष की उम्र के बाद ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राम और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जैसी जांचें करवाना बहुत जरूरी है। समय-समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचते रहें। इन जांच की मदद से जोखिमों को समय से पता लगाने और इसके आधार पर बचाव के उपाय करने में मदद मिलती है।

आहार पर दें खास ध्यान
  • हृदय रोगों से बचाव में आहार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण अधिक होती है। अगर आपके परिवार में भी हृदय रोगों का इतिहास है तो सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और नमक का सेवन कम करें। रोजाना अपने भोजन में फाइबर युक्त अनाज, हरी सब्जियां, फल और ओमेगा-3 युक्त फिश या नट्स शामिल करें।
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हृदय रोगों से बचाव के करें उपाय - फोटो : Freepik
नियमित व्यायाम की बनाएं आदत
  • दिल की बीमारियों से बचे रहने के लिए नियमित व्यायाम की आदत बनाना भी जरूरी है। दिन में सिर्फ 30 मिनट का तेज चलना या हल्का कार्डियो अभ्यास हृदय को मजबूत बनाता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार, नियमित व्यायाम करने वालों में हृदय रोग का खतरा 35% तक कम होता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योगासन भी अपनाएं, इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और तनाव कम होता है।

धूम्रपान और शराब से बनाएं दूरी 
  • जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से हृदय रोग का जोखिम होता है, उनके लिए सिगरेट और शराब किसी जहर से कम नहीं। निकोटिन और अल्कोहल रक्त वाहिकाओं को संकुचित करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और धमनियां कमजोर होती हैं। धूम्रपान छोड़ने के 1 साल के भीतर हृदय रोग का खतरा 50% तक घट सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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