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Health Tips: 100 साल की उम्र के लिए डॉक्टर ने सुझाए लाइफस्टाइल में ये बदलाव, आज से ही करें पालन

Fri, 02 Jan 2026 05:08 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Healthy Lifestyle Tips: हमारे देश में लोगों की औसत आयु लगभग 75 वर्ष है। मगर बहुत से लोग 100 साल तक जीवन जीते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं कि लंबी उम्र तक जीवन जीने के लिए दिनचर्या क्या बदलाव करना जरूरी है।
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लंबी उम्र के लिए जीवशैली में ये बदलाव जरूरी - फोटो : Amar Ujala
Lifestyle Changes For Long Life: दुनिया भर में लंबी और स्वस्थ उम्र जीने के मामले में जापान के लोग सबसे आगे हैं। विशेषकर जापान के ओकिनावा जैसे क्षेत्रों में 'सौ साल' की उम्र पार करने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है। आखिर उनके जीवन और खान-पान में ऐसा क्या रहस्य छिपा है जो उन्हें वृद्धावस्था में भी बीमारियों से मुक्त और ऊर्जावान बनाए रखता है? चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी लंबी आयु का राज महंगे सप्लीमेंट्स में नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी स्वस्थ आदतों और अनुशासन में है। 

वे भोजन को केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि औषधि के रूप में देखते हैं। हम भारतीय अक्सर स्वाद के चक्कर में अपनी थाली में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत अधिक और पोषक तत्वों की मात्रा कम कर देते हैं, जो समय से पहले बुढ़ापे और बीमारियों का कारण बनता है। 

इसी संदर्भ में जापानी जीवनशैली के इन गहरे रहस्यों को साझा करते हुए स्वास्थ्य मार्गदर्शिका डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे बदलाव सुझाए हैं जिन्हें अपनाकर कोई भी लंबी उम्र की ओर कदम बढ़ा सकता है।
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स्वस्थ आहार का करें सेवन - फोटो : Freepik.com
प्रोटीन और फाइबर का सही संतुलन
डॉ. सोलंकी के अनुसार, हमें जापानी 'बेंटो बॉक्स' मॉडल को अपनाने की जरूरत है। भारतीय भोजन में रोटी-चावल (कार्ब्स) की प्रधानता होती है, जबकि बेंटो बॉक्स प्रोटीन और फाइबर की जरूरतों के हिसाब से बनता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट सबसे कम, प्रोटीन मध्यम और फाइबर (सब्जी, सलाद) सबसे अधिक होता है। अगर हम अपनी थाली में अनाज घटाकर सब्जी और दाल बढ़ा दें, तो कई बीमारियों से बच सकते हैं।

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पौष्टिक खानपान - फोटो : Adobe
भूख से थोड़ा कम खाने की कला
लंबी उम्र का दूसरा बड़ा मंत्र है 'हारा हची बू'। इसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपना पेट केवल 80 प्रतिशत ही भरना चाहिए और बाकी 20 प्रतिशत हिस्सा खाली छोड़ देना चाहिए। डॉ. सोलंकी बताती हैं कि जब हम पेट पूरी तरह भरने तक खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और शरीर में सूजन बढ़ती है। 80% के नियम से ओवरईटिंग कभी नहीं होती और मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रहता है।

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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
खाने का सही क्रम
अक्सर हम रोटी या चावल से भोजन शुरू करते हैं, लेकिन डॉ. सोलंकी 'वेजीज फर्स्ट' यानी पहले सब्जियां खाने की सलाह देती हैं। अपनी प्लेट में सबसे पहले सलाद और फर्मेंटेड फूड (जैसे अचार या दही) खाएं, उसके बाद पका हुआ साग या सब्जियां लें और अंत में अनाज का सेवन करें। यह क्रम ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है और शरीर को भोजन के सभी पोषक तत्व सोखने में मदद करता है।
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लो कुकिंग ऑयल पद्धति का उपयोग करें (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe stock
लो कुकिंग ऑयल पद्धति का उपयोग
जापानी लोग गहरे तले हुए भोजन के बजाय लो कुकिंग ऑयल सिस्टम का उपयोग करते हैं। डॉ. सोलंकी के अनुसार, भोजन बनाने के लिए स्टीमिंग (भाप), ग्रिलिंग, सिमरिंग और बॉइलिंग जैसी पद्धतियों का उपयोग करना चाहिए। अत्यधिक तेल और उच्च तापमान पर पकाया गया भोजन अपने पोषक तत्व खो देता है और शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। कम तेल और हल्की आंच पर बना भोजन लंबी उम्र की सबसे बड़ी कुंजी है।
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ग्रीन टी - फोटो : Freepik
ग्रीन टी
दूध वाली चाय या कॉफी के अत्यधिक सेवन के बजाय डॉ. सोलंकी ग्रीन टी के सेवन पर जोर देती हैं। ग्रीन टी 'कैटेचिन' जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाती है और हृदय रोगों के खतरे को कम करती है। दिन में 1-2 कप ग्रीन टी पीना शरीर के 'मेटाबॉलिज्म' को बढ़ाने और बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकने में अत्यंत प्रभावी साबित होता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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