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Alzhimer: आपको अल्जाइमर तो नहीं है? घर बैठे लगा सकते हैं इसका पता, डॉक्टर ने बताया आसान तरीका

Sat, 01 Nov 2025 05:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • किसी को अल्जाइमर-डिमेंशिय रोग है या नहीं इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञ ने कुछ सवाल बताए हैं जो आपको खुद से पूछने चाहिए, इससे काफी हद तक अंदाजा लगया जा सकता है कि आपको समस्या है या नहीं?
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अल्जाइमर रोग के खतरे को जानिए - फोटो : Adobe Stock
मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का खतरा जो पहले उम्र बढ़ने के साथ देखा जाता था, अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में 30 से कम उम्र के लोग कई तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इसे गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

याददाश्त की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई,  व्यवहारिक बदलाव जैसी दिक्कतें अब काफी आम हो गई है। ब्रेन से संबंधित एक और बीमारी का ग्राफ हाल के दशकों में तेजी से ऊपर चढ़ा है। हम बात कर रहे हैं- अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया की। 

अल्जाइमर और डिमेंशिया आमतौर पर 60 की उम्र के बाद होने वाली बीमारी रही है, हालांकि मेडिकल रिपोर्ट्स में चिंता जताई जा रही है कि इसका खतरा अब  50 वर्ष की उम्र में भी लोगों में भी देखा जा रहा है। बदलती जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता के चलते इस बीमारी का खतरा समय से पहले ही देखा जाने लगा है।

अब लोगों के मन में बड़ा सवाल ये है कि आखिर कैसे पता लगाया जाए कि किसी को अल्जाइमर रोग है तो नहीं, या फिर इसकी शुरुआत तो नहीं हो रही है?
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अल्जाइमर-डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया का खतरा

यहां समझना जरूरी है कि अल्जाइमर रोग दरअसल डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त कम होने लगती है, व्यक्ति को अपने आसपास के लोगों, जगहों और घटनाओं की पहचान में कठिनाई होने लगती है। वहीं डिमेंशिया एक व्यापक शब्द है, जिसमें मस्तिष्क की सोचने, याद रखने और निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ता है।

किसी को अल्जाइमर-डिमेंशिय रोग है या नहीं इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञ ने कुछ सवाल बताए हैं जो आपको खुद से पूछने चाहिए, इससे काफी हद तक अंदाजा लगया जा सकता है कि आपको समस्या है या नहीं?
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डिमेंशिया के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
कहीं आपको भी तो नहीं है अल्जाइमर?

जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में अल्जाइमर विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीटर रबिन्स ने 40 वर्षों तक इस बीमारी से पीड़ित लोगों पर अध्ययन किया। वह कहते हैं, ये समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। अगर आप वास्तव में चिंतित हैं कि आपको यह बीमारी हो सकती है, तो खुद से कुछ सवाल पूछें, इससे स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

क्या आपको अपने करीबी दोस्तों या परिवार के सदस्यों के नाम याद रखने में दिक्कत हो रही है?

अगर आपको कोई शब्द या नाम याद रखने में दिक्कत हो रही है, तो डॉ. रबिन्स ने बताया कि यह अल्जाइमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। 30 या 40 की उम्र में अगर आप अपना चश्मा या चाभियां गलत जगह रख देते हैं और ढूंढ नहीं पाते तो ये अल्जाइमर नहीं है। पर रिश्तेदारों, करीबी दोस्तों या महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में भूल जाना, याद ही न कर पाना कहीं ज्यादा चिंताजनक है।

आपको वो काम करने में भी दिक्कत हो रही है जिन्हें पहले आसानी से करते थे?

अगर आपको अचानक लगे कि पैसों को मैनेज करने या खाना बनाने में दिक्कत हो रही है, जबकि आप दशकों से बिना किसी परेशानी के ऐसा करते आए हैं, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। अचानक काम करने में दिक्कत होने का असली कारण संज्ञानात्मक गिरावट है।
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ब्रेन हेल्थ को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
क्या आप ऐसे काम कर सकते हैं जिनमें एक साथ लोगों की जरूरत होती है?

डॉक्टर कहते हैं, जिन क्लीनिकों में अल्जाइमर की जांच की जाती है, वहां मरीजों को गणित के सवालों के जवाब देने को कहा जाता है। यह उनके दिमाग में एक साथ कई चीजें रखने की क्षमता का आकलन करने के लिए होता है। अगर आप एक साथ कई काम करने में असहजता पाते हैं, कई लोगों के साथ काम करने में दिक्कत हो रही है तो ये अल्जाइमर का संकेत हो सकता है।

आप शराब तो नहीं पीते हैं?

डॉ. रबिन्स कहते हैं, 60 की उम्र के बाद हमारा शरीर शराब का ठीक तरीके से मेटाबॉलिज्म नहीं कर पाता है। अगर आप शराब पीते हैं तो इसके कारण भी ब्रेन हेल्थ गड़बड़ हो सकती है और अल्जाइमर होने का खतरा बढ़ सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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