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हर भारतीय तक कैसे पहुंचेगी कोरोना की वैक्सीन, क्या डिजिटल आईडी होगी जरूरी? जानें स्वास्थ्य सचिव का जवाब

Wed, 21 Oct 2020 07:00 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : iStock
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों को इसकी एक कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन ने तीसरे चरण का ट्रायल पूरा होने से पहले ही वैक्सीन को मंजूरी दे दी है और उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को टीका लगाया जाने लगा है। वहीं भारत में नागरिक सुरक्षा को देखते हुए अबतक ऐसा नहीं किया गया है। हालांकि यहां तीन वैक्सीन कामयाबी से बस एक कदम दूर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने साल 2021 की शुरुआत में वैक्सीन उपलब्ध हो जाने का भरोसा जताया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित करते हुए वैक्सीन की अच्छी प्रगति की चर्चा की। आम लोगों तक वैक्सीन पहुंचे, इसके लिए सरकार कई स्तर पर काम कर रही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बता दें कि सरकार ने एक खास वेबसाइट भी लॉन्च की है, जहां देश में विकसित हो रही वैक्सीन की प्रगति को लेकर हर अपडेट मौजूद है। इसके साथ ही कई स्तर पर विशेषज्ञों की केंद्रीय समिति बनाई गई है, जो वैक्सीन तैयार होने से लेकर इसके वितरण और टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए अभी से ही योजना बना रही है। पहले चरण के कार्यक्रम का प्लान लगभग ड्राफ्ट कर लिया गया है, जिसके मुताबिक उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। इसमें स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे। हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचे, इसको लेकर भी योजना तैयार की जा रही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
साल 2021 में कोरोना वायरस की वैक्सीन आने को लेकर उम्मीद जताई गई है। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि सभी लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन कैसे उपलब्ध कराई जाएगी। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आ रही थी कि कोरोना वैक्सीन लेने के लिए नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (NDHM) की डिजिटल आईडी अनिवार्य होगी। इस सवाल पर मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने स्पष्ट किया कि यह अनिवार्य शर्त नहीं होगी। 

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स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण - फोटो : एएनआई
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा, हर देशवासी को कोरोना की वैक्सीन मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के पहचान पत्र (ID) का इस्तेमाल किया जाएगा। आगे उन्होंने कहा कि देश में अभी जो एनडीएचएम की सेवाएं मौजूद हैं, उनके लिए किसी भी प्रकार की आईडी जरूरी नहीं है। ऐसे में यह कहना ठीक नहीं होगा कि सिर्फ वैक्सीन के लिए ही आईडी को अनिवार्य किया जाएगा। ऐसा नहीं है कि जिसके पास डिजिटल आईडी नहीं है, वे टीकाकरण से वंचित रह जाएंगे।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण - फोटो : एएनआई
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि हेल्थ आईडी का इस्तेमाल खासकर वैसे मामलों में किया जाएगा, जब व्यक्ति/लाभार्थी के पास (दूसरा) हेल्थ आईडी नहीं है। उन्होंने कहा कि कई अन्य आईडी भी हैं जिनका एनडीएचएम के मामले में उपयोग किया जा सकता है। आम चुनावों में जैसे वोट डालने के लिए लोगों के पास पहचान पत्र के कई सारे विकल्प दिए जाते हैं, वैक्सीन के लिए भी वैसा ही रहेगा, ताकि कोई भी टीकाकरण से वंचित न रहे।
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Twitter/Amar Ujala
इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को डिजिटल हेल्थ आईडी को लेकर डाटा प्रबंधन नीति पर सात हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिली हैं। सरकार उनके आधार पर कोई नीति ला सकती है। इस संबंध में संसद में भी एक विधेयक लंबित है। उन्होंने कहा कि एनडीएचएम के पास अपनी एक डाटा प्रबंधन नीति है, जो पिछले एक महीने से सार्वजनिक है। हमें भी यही प्राप्त हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समय लगेगा, लेकिन सभी लोगों के लिए कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। मालूम हो कि भारत में विकसित हो रही तीन वैक्सीन कामयाबी के करीब है। 
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