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Alert: थायरॉइड से न सिर्फ बढ़ रहा मोटापा, मां बनने की उम्मीद भी हो रही कमजोर, डॉक्टर ने किया सावधान

Sun, 20 Jul 2025 09:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत पर, विशेषकर गर्भधारण और इससे संबंधित स्थितियों पर थायरॉइड विकारों का गंभीर असर हो सकता है।
  • थायरॉइड की समस्याएं, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों ही प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था को काफी प्रभावित कर सकती हैं। 
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थाइरॉइड की समस्या और इसके दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
Thyroid Disease & Infertility: पिछले एक दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि जिन स्वास्थ्य समस्याओं ने लोगों की सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, हृदय रोग-डायबिटीज और कैंसर के साथ थायरॉइड भी उनमें से एक है। थायरॉइड को लेकर वैसे तो ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर खतरों को बढ़ाने वाला पाते हैं।

थायरॉइड हमारे शरीर की एक महत्वपूर्ण एंडोक्राइन ग्रंथि है, जो गर्दन के निचले हिस्से में स्थित होती है। यह ग्रंथि थायरॉक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स का निर्माण करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और हॉर्मोन संतुलन को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि किसी कारणवश सामान्य रूप से काम नहीं करती या इसके कार्यों में कोई बाधा आ जाती है तो इससे हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) या हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की अधिकता) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

थायरॉइड की समस्याएं महिलाओं में ज्यादा आम हैं और उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती हैं, खासकर मासिक धर्म चक्र, प्रजनन क्षमता और समग्र स्वास्थ्य पर। इसके कारण थकान, वजन में बदलाव और मूड स्विंग जैसे कई लक्षण हो सकते हैं। 

क्या आप जानते हैं कि थायरॉइड की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका उपचार न हो पाए तो ये बीमारी आपसे मां बनने का सुख भी छीन सकती है?
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थायरॉइड विकारों का सेहत पर असर - फोटो : Adobe stock
महिलाओं की सेहत पर थायरॉइड विकारों का असर

अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत पर, विशेषकर गर्भधारण और इससे संबंधित स्थितियों पर थायरॉइड विकारों का गंभीर असर हो सकता है। थायरॉइड की समस्याएं, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों ही प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था को काफी प्रभावित कर सकती हैं। ये स्थितियां मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकती हैं, ओव्यूलेशन में बाधा डाल सकती हैं, और गर्भावस्था के दौरान गर्भपात और अन्य जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
  • थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी अंडाशय को अंडा रिलीज करने (ओव्यूलेशन) में बाधा उत्पन्न कर सकती है और गर्भाशय की परत के विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
  • वहीं थायरॉइड हार्मोन की अधिकता अनियमित मासिक धर्म और अंडों के निषेचन से संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
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गर्भधारण में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं डॉक्टर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, युवा अवस्था में थायरॉइड विकारों के कारण से महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी बढ़ सकती है। अस्पतालों की रिपोर्ट के मुताबिक, इन्फर्टिलिटी की समस्या लेकर आ रहीं महिलाओं में 25 फीसदी में थायरॉइड की समस्या मिल रही है।

अमर उजाला से बातचीत में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ रश्मि सिंह बताती हैं, गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड होने की आशंका बढ़ जाती है।थायरॉइड हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव की स्थिति आपकी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है। 

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थायरॉइड विकारों का गर्भावस्था पर असर - फोटो : Freepik.com
गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक की समस्याएं

थायरॉइड समस्याओं की शिकार महिलाओं में गर्भपात होने, कंसीव न होने, बच्चा के प्री-मैच्योर होना है, बच्चे का वजन कम होने जैसी समस्याएं देखी जाती रही हैं। महिलाओं और बच्चे में ये समस्याएं एक तरह की होती हैं। लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जो अलग-अलग होती हैं।
  • हाइपोथायरायडिज्म में अगर इलाज नहीं किया गया तो बच्चे के ब्रेन और नर्वस सिस्टम के विकास पर असर पड़ता है। ऐसे बच्चे चलना और बोलना देरी से शुरू करते हैं। इसके अलावा आईक्यू लेवल भी कम होता है। बच्चों में सीखने की प्रक्रिया भी धीमी होती है।
  • हाइपरथायरायडिज्म में बच्चे को भी थायरॉइड विकार होने की आशंका बढ़ जाती है।
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थायरॉइड की समस्या को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : freepik
महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टर कहती हैं, सभी महिलाओं को नियमित बॉडी चेकअप के दौरान डॉक्टर की सलाह के आधार पर थायरॉइड टेस्ट जरूर कराते रहना चाहिए। अगर इसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो इसका समय रहते इलाज कराएं। 
  • थायरॉइड विकारों की रोकथाम के लिए जीवनशैली में बदलाव, खान-पान पर ध्यान देना और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
  • स्वस्थ आहार का सेवन जिसमें हरी सब्जियां-फल हों साथ ही भोजन में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन होना जरूरी है।
  • इसके इलावा तनाव प्रबंधन, धूम्रपान और पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों से बचना भी आपके स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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