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Health Tips: तनाव से खराब हो रहा है पेट, गैस और बदहजमी का कनेक्शन है मेंटल स्ट्रेस से

Tue, 18 Nov 2025 06:41 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How Stress Related to Digetion: आज के समय में बहुत से लोग पाचन संबंधी समस्या से परेशान रहते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे आपका खान-पान, आपकी दिनचर्या, मानसिक तनाव आदि। देखा जाए तो मेंटल स्ट्रेस एक बड़ा कारण है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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मानसिक तनाव - फोटो : Adobe Stock
Tanav se Kabz Aur Acidity: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव एक ऐसी आम समस्या बन गई है, जिसका असर केवल हमारे दिमाग पर ही नहीं, बल्कि सीधे हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। क्या आपने कभी महसूस किया है कि परीक्षा या किसी बड़े इंटरव्यू से पहले आपका पेट खराब हो जाता है? इसकी वजह है आंत-मस्तिष्क अक्ष एक जटिल संचार प्रणाली जो आपके पेट और दिमाग को जोड़ती है।

जब आप लगातार तनाव में रहते हैं, तो मस्तिष्क तुरंत एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन जारी करता है। ये हार्मोन 'लड़ो या भागो' मोड को सक्रिय करते हैं, जिससे पाचन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शरीर आवश्यक ब्लड फ्लो को पेट से हटाकर मांसपेशियों की ओर मोड़ देता है। नतीजतन भोजन पचने में अधिक समय लेता है, जिससे कब्ज, बदहजमी और एसिडिटी जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं।

इसे समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि अगर आप अपने पाचन को सुधारना चाहते हैं, तो आपको सिर्फ खान-पान पर नहीं, बल्कि अपने तनाव प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कई मामलों में देखने को मिलता है कि जो लोग अपने मानसिक तनाव को ठीक कर लेते हैं उनकी पाचन से संबंधी ज्यादातर समस्याएं अपने आप ठीक हो जाती हैं।
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पाचन - फोटो : adobe stock images
पाचन क्रिया का धीमा पड़ना
तनाव की स्थिति में, शरीर पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल जारी होने पर मस्तिष्क यह संकेत देता है कि पाचन अब प्राथमिकता नहीं है। इससे आंतों की सामान्य गति मंद पड़ जाती है, जिसके कारण भोजन पेट में लंबे समय तक पड़ा रहता है। यही धीमी गति बदहजमी और अंततः कब्ज का कारण बनती है।

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पेट की समस्या - फोटो : Freepik.com
एसिड और जलन का बढ़ना
मानसिक तनाव सीधे पेट में एसिड (गैस्ट्रिक एसिड) के उत्पादन को बढ़ा सकता है। यह अतिरिक्त एसिड पेट की अंदरूनी परत को परेशान करता है और एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या को ट्रिगर करता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ तनाव अल्सर जैसी गंभीर पाचन समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

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यूटीआई - फोटो : Freepik.com
आंतों की संवेदनशीलता में वृद्धि
तनाव आंतों को बाहरी उत्तेजनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बना देता है। यह संवेदनशीलता उन लोगों में विशेष रूप से देखी जाती है जिन्हें इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम है। जरा सा भी तनाव होने पर पेट में तेज ऐंठन, दर्द, और अचानक दस्त या कब्ज ट्रिगर हो सकते हैं।
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पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock
माइक्रोबायोम का असंतुलन
दीर्घकालिक तनाव आपकी आंतों में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देता है। अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम होने से पाचन और पोषण का अवशोषण प्रभावित होता है। इससे सूजन बढ़ती है, जो आपके समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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