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स्मोकिंग: सिगरेट पीने से किडनी पर कैसे पड़ता है असर, क्या हो सकती हैं दिक्कतें? सभी के लिए जानना जरूरी

Tue, 01 Sep 2026 08:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धूम्रपान का नुकसान केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। निकोटीन और तंबाकू के जहरीले रसायन रक्त वाहिकाओं, किडनी, दिल, दिमाग और कई दूसरे अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। शोध में धूम्रपान को क्रॉनिक किडनी डिजीज का बड़ा कारण पाया गया है।
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स्मोकिंग के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल की जिन आदतों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सबसे ज्यादा नुकसानदायक बताते हैं, धूम्रपान यानी सिगरेट पीना उनमें से एक है। आमतौर पर धूम्रपान को फेफड़ों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता रहा है। इससे सांस फूलने, अस्थमा अटैक से लेकर लंग्स कैंसर तक का खतरा हो सकता है।

लेकिन सिगरेट का असर केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता। धुएं में मौजूद हजारों रसायन सांस के साथ शरीर में पहुंचकर खून के जरिए अलग-अलग अंगों तक जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, तंबाकू शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारी, प्रजनन क्षमता में कमी और समय से पहले मौत का खतरा हो सकता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है। यही कारण कि सिगरेट पीने वाले लोगों में किडनी डैमेज का खतरा अधिक देखा जाता है।
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स्मोकिंग के नुकसान - फोटो : Freepil.com
सिगरेट से किडनी को खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किडनी का काम सिर्फ पेशाब बनाना नहीं है। यह खून को फिल्टर करने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने के साथ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करती है। धूम्रपान से रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है और किडनी तक पहुंचने वाले रक्त का संचार प्रभावित हो सकता है। 
 
  • सिगरेट का नुकसान एक अंग से शुरू होकर पूरे शरीर की रक्त वाहिकाओं और अंगों को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
  • दिल और दिमाग तक पहुंचने वाली रक्त वाहिकाएं भी इससे प्रभावित होती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। 
  • इतना ही नहीं, धूम्रपान कैंसर के जोखिम, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता, मुंह और मसूड़ों की सेहत, प्रजनन क्षमता और हड्डियों सहित पर भी पड़ता है।
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किडनी की सेहत पर असर - फोटो : Adobe stock
किडनी पर धूम्रपान का असर

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि किडनी लगातार खून को फिल्टर करती है, लेकिन धूम्रपान इस पूरी प्रक्रिया पर दबाव डाल सकता है। 
 
  • निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। 
  • इतना ही नहीं निकोटीन के कारण अध्ययनों में किडनी के रक्त प्रवाह और ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट में अस्थायी कमी देखी गई है। 
  • धूम्रपान से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी बढ़ जाती हैं, जो किडनी की संरचना और कार्य को प्रभावित कर सकती हैं।

कई अध्ययनों में धूम्रपान और क्रॉनिक किडनी डिजीज के बीच लिंक पाया गया है। अगर आपको पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की समस्या है और सिगरेट पीते हैं तो जोखिम और भी बढ़ सकता है।

रक्त वाहिकाओं की समस्या

सिगरेट से किडनी को होने वाले नुकसान को समझने के लिए रक्त वाहिकाओं पर धूम्रपान के प्रभाव को समझना जरूरी है। 
 
  • सिगरेट का धुआं शरीर में ऐसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देता है जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 
  • अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान रक्त को अधिक चिपचिपा बना देता है जिससे थक्के बनने का खतरा भी बढ़ा सकती है।

यह बदलाव सिर्फ किडनी तक सीमित नहीं रहते। किडनी को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए लंबे समय तक रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला दबाव और उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित होने से किडनी के लिए सामान्य कामकाज भी मुश्किल हो जाता है।
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धूम्रपान से कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान से और क्या दिक्कतें होती हैं?

धूम्रपान के कारण जब रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं तो उसका सीधा असर दिल और दिमाग पर भी पड़ता है। धूम्रपान कोरोनरी हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में लगभग 2 से 4 गुना बढ़ा देता है। धूम्रपान से ट्राइग्लिसराइड और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का भी जोखिम होता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।
 
  • धूम्रपान को आमतौर पर लंग कैंसर का कारण माना जाता है, लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि तंबाकू 20 से अधिक प्रकार के कैंसर को बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • तंबाकू के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें कम से कम 250 ऐसे रसायन हैं जिन्हें विषाक्त या कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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