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हेल्थ टिप्स: शरीर ही नहीं दिमाग भी हो रहा है आपकी इन आदतों से परेशान, तुरंत करें सुधार

Sat, 03 Oct 2026 11:15 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Good Habits:  हमारी रोजमर्रा की आदतों का मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार नकारात्मक सोच मानसिक और भावनात्मक सेहत को प्रभावित कर सकती है। इन आदतों को पहचानकर दिनचर्या में छोटे बदलाव करना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकता है।
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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारी रोजमर्रा की जिंदगी, काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता से है। जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है, उसी तरह दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए भी अपनी आदतों पर नजर रखना जरूरी है।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई ऐसी आदतें आम हो गई हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक और भावनात्मक सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर बढ़ती उम्र के साथ इन पर ध्यान देना और भी जरूरी हो जाता है।
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स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या - फोटो : Freepik.com
इन आदतों पर रखें नजर

हमारी दिनचर्या में शामिल छोटी-छोटी चीजें लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।
 
  • देर रात तक मोबाइल चलाना, अच्छी नींद न लेना, लगातार नकारात्मक सोच और खानपान को लेकर लापरवाही ऐसी ही आदतें हैं, जिनका सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।
  • अगर समय रहते इनकी पहचान कर ली जाए और इनमें बदलाव किया जाए, तो मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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बढ़ता स्क्रीन टाइम नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना

मोबाइल फोन और सोशल मीडिया आज जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। बच्चे हों या बड़े, कई लोग दिन का काफी समय वीडियो, पोस्ट और अलग-अलग तरह की सामग्री देखते हुए गुजार देते हैं।
 
  • लगातार स्क्रीन देखते रहने से दिमाग को आराम और वास्तविक जीवन की गतिविधियों के लिए कम समय मिल सकता है।
  • सोशल मीडिया पर लगातार मिलने वाली गैरजरूरी या अनहेल्दी कंटेंट भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए मोबाइल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी है।


नींद को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अच्छी नींद सिर्फ शरीर की थकान दूर करने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए भी अहम है। लगातार कम सोने से ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद रखने और सही निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है। नींद की कमी तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है और मूड पर भी असर डाल सकती है। इसलिए रोजाना करीब 7 से 9 घंटे की अच्छी और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए।
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निगेटिव थिंकिंग का असर - फोटो : Freepik.com
हर समय नकारात्मक सोचना

बार-बार खुद को गलत ठहराना, अपनी कमियों को लेकर लगातार चिंतित रहना या हर स्थिति का नकारात्मक पहलू देखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। ऐसी सोच धीरे-धीरे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को प्रभावित कर सकती है। लगातार नकारात्मक विचार तनाव और चिंता को बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपनी गलतियों से सीखना जरूरी है, लेकिन हर बात के लिए खुद को दोषी ठहराने की आदत से बचना भी उतना ही जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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