आजकल देर रात तक मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर काम करना, वेब सीरीज देखना या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। रात में देर तक जागते रहने से सोने और सुबह उठने का समय भी आगे बढ़ जाता है।
वैसे तो लोगों को ये आदत सामान्य लग सकती है, लेकिन अगर इससे नींद लगातार कम हो रही है या सोने-जागने का समय शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम से मेल नहीं खाता, तो इसका सेहत पर असर पड़ सकता है। हमारा शरीर एक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम के अनुसार काम करता है, जो नींद-जागने के चक्र के साथ कई हार्मोन के स्राव को भी नियंत्रित करती है।
मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, इंसुलिन और भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन इससे प्रभावित हो सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि भले ही आपको अभी एहसास न हो पर रोजाना देर रात तक जागने से शरीर का पूरा हार्मोनल बैलेंस गड़बड़ हो सकता है?