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ध्यान दें: नाखूनों को देखकर जानिए कहीं आपको कैंसर तो नहीं? ऐसे लक्षण माने जाते हैं संकेत

Mon, 15 Nov 2021 06:30 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नाखून से लगाए कैंसर का पता - फोटो : Pixabay
शरीर के प्रत्येक अंग की अपनी अलग खासियत होती है। नाखून हमारे शरीर का एक अभिन्न अंग हैं जो हाथ और पैर की उंगलियों की रक्षा करता है। चीजों को उठा पाना, पकड़ना, लिखना, खाना, नाखून के बिना कुछ भी संभव नहीं है। पर क्या आप जानते हैं कि नाखून के माध्यम से शरीर में बन रही कई गंभीर बीमारियों का पता लगाया जा सकता है? जी हां, अध्ययनों से पता चलता है कि नाखून के माध्यम से कैंसर सहित कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर हम नाखूनों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं, हालांकि इनके रंग और बनावट में होने वाले बदलाव पर ध्यान देकर शरीर में पनप रही कई गंभीर समस्याओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। आपको भी यह जानकर आश्चर्य होगा कि नाखून, कैंसर तक का निदान करने में मदद कर सकते हैं। कैसे? आइए इस बार में आगे की स्लाइडों में जानते हैं। 
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कैंसर के खतरे को पहचानिए - फोटो : Pixabay
नाखून के रंग में बदलाव को लेकर रहें सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नाखूनों का रंग सफेद और उसके नीचे हल्का गुलाबी होना सामान्य है। हालांकि अगर आपको इसमें कुछ भी अलग या आसामान्य लगे तो इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता होती है। सामान्यतौर पर नाखूनों का पीला या मोटा होना फंगल संक्रमण का संकेत दे सकता है, जबकि नाखूनों का टूटना या भंगुर होना थायराइड रोग या एनीमिया का संकेत हो सकता है। यदि आप अपने नाखूनों में गड्ढे या छोटी दरारें देखते हैं, तो यह सोरायसिस या एलोपेसिया एरीटा का संकेत हो सकता है। नाखूनों के नीचे सफेद रेखाएं किडनी या लिवर की बीमारी का संकेत हो सकती हैं। हालांकि इसके वास्तविक निदान के लिए डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक माना जाता है। 
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नाखून के रंग में बदलाव - फोटो : iStock
नाखून के रंग में बदलाव कैंसर का हो सकता है संकेत 

अध्ययनों से पता चलता है कि नाखून के रंग में बदलाव गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और कई स्थितियों में यह कैंसर तक का भी संकेत हो सकता है। नाखून के रंग में बदलाव को सबंगुअल मेलेनोमा नामक त्वचा कैंसर का संकेत माना जाता है। इस स्थिति में नाखूनों के नीचे एक डार्क लाइन दिखाई देती सकता है, जिससे स्वाभाविक तौर पर नाखून का रंग खराब हो सकता है। इसके अलावा नाखून के क्यूटिकल के पास काला दाग हो सकता है। 
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि  कैंसर के उपचार के परिणाम के कारण भी नाखून के रंग में इस तरह के बदलाव हो सकते हैं। कैंसर की कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी नाखूनों का रंग काला पड़ सकता है। 

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नाखून से जानिए सेहत का हाल - फोटो : iStock
कैंसर के इन लक्षणों को भी ध्यान में रखें

सबंगुअल मेलेनोमा कैंसर में उंगली या पैर के नाखूनों पर काले दाग बनने के अलावा नाखूनों में कुछ और परिवर्तनों पर भी गौर करना आवश्यक होता है। नाखूनों के नीचे कालेपन के अलावा अगर नाखूनों में इस तरह की दिक्कत दिखती हो तो इस बारे में विशेष सावधान हो जाने की आवश्यकता होती है। ऐसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच कराना आवश्यक हो जाता है। 
  • नाखूनों के आसपास खून बहना या खून के थक्के जैसा नजर आना। 
  • नाखूनों के नीचे की काली-भूरी धारियों का बढ़ते जाना।
  • नाखूनों का कमजोर होना या भंगुर हो जाना।
  • नाखून पर चोट जैसे निशान दिखना जो बहुत समय से ठीक न हो रहा हो।
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विशेषज्ञ से लें सलाह - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ विष्णुदत्त अस्थाना (कैंसर हॉस्पिटल, नासिक) बताते हैं, नाखूनों के रंग में बदलाव या इसका कमजोर होना कई अन्य कारणों से भी हो सकता है, हर स्थिति में इसे कैंसर नहीं माना जा सकता है। हालांकि यदि आपमें नाखूनों से संबंधित दो से अधिक असामान्यता लंबे समय तक बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक हो जाता है। कैंसर का संदेह होने पर फिलकल टेस्ट और बायोप्सी के माध्यम से इसका निदान करने में मदद मिल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि कैंसर का यदि समय पर निदान हो जाए तो इसका उपचार और ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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