लॉकडाउन की अपनी मुश्किलें हैं, पर अच्छी बात ये है कि इससे जान सुरक्षित है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि लोगों की आदतें बिगड़ रही हैं, जिसका असर बॉडी क्लॉक पर पड़ रहा है। सबसे अधिक रात की नींद प्रभावित हो रही है, जिसके कारण वे तनाव, अनिद्रा और अवसाद की ओर जा रहे हैं। रात को सात घंटे की नींद व दिनचर्या के पालन से ही स्वस्थ रह सकते हैं। साइकोलॉजिस्ट और सिडनी यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग के प्रो. निक ग्लोजियर का कहना है कि अगर दिन में बहुत अधिक सो लेते हैं तो सामान्य दिनों में रात में जितनी नींद लेते होंगे उससे 30 से 45 मिनट बाद ही सो पाएंगे। अगर आप दिन में बहुत देर तक सो रहे हैं तो ये बॉडी क्लॉक खराब होने का शुरुआती लक्षण है, जिसका मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।