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Alert: मोबाइल-इंटरनेट पर निर्भरता ने दिमाग को बना दिया ‘आलसी’, ब्रेन के लिए सामान्य कामकाज भी हो रहा मुश्किल

Sat, 22 Aug 2026 09:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोबाइल हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ध्यान, एकाग्रता, नींद और याददाश्त को प्रभावित कर सकता है। बार-बार फोन चेक करना, हर जानकारी तुरंत इंटरनेट पर खोजना, एक साथ कई काम करना और रात में मोबाइल चलाना दिमाग पर असर डालने वाली आदतें हैं।
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मोबाइल की लत का दिमाग पर असर - फोटो : Amarujala.com/AI
सुबह उठने से लेकर रात में सोने से कुछ मिनट पहले तक हम मोबाइल से चिपके रहते हैं। कभी सोशल मीडिया देखना, कभी मैसेज का रिप्लाई करना, खाना खाते हुए भी वीडियो देखते रहना और काम के बीच भी हर थोड़ी देर में स्क्रीन का नोटिफिकेशन चेक करते रहना, ये सभी बहुत आम सी आदतें हो गई हैं।

टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को काफी आसान बना दिया है पर क्या आप जानते हैं कि वो इसके बदले हमसे कितनी महंगी कीमत ले रहा है? मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मोबाइल पर बढ़ती हमारी निर्भरता ने दिमाग को न सिर्फ आलसी तो बना ही दिया है, साथ ही उसकी काबिलियत को भी कम कर दिया है। मसलन मोबाइल की बढ़ती लत और हर काम के लिए इसकी निर्भरता ने अब हमारे दिमाग के सामान्य कामकाज को भी कमजोर कर दिया है। शोधकर्ता मोबाइल को दिमाग का दुश्मन बता रहे हैं। 

वैज्ञानिक बताते हैं कि तकनीक का असर इस बात पर काफी निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं? लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, एक साथ कई काम करने की आदत, हर छोटी जानकारी के लिए इंटरनेट पर निर्भर रहना और सोने से ठीक पहले मोबाइल चलाना ऐसी आदतें हैं जो ध्यान, नींद और मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर सकती हैं। 
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मोबाइल का ब्रेन हेल्थ पर असर - फोटो : Amarujala.com/AI
मोबाइल और इसका सेहत पर असर

एक मेटा-विश्लेषण में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 22 अध्ययनों के जरिए इसके प्रभावों को समझने की कोशिश की। इसमें मोबाइल की मौजूदगी या इस्तेमाल को याददाश्त, ध्यान और सामान्य संज्ञानात्मक प्रदर्शन पर नकारात्मक असर डालते हुए पाया गया।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर छोटी-छोटी बात के लिए इंटरनेट पर निर्भर रहना चीजों को याद रखने की आदत को कम कर रहा है।
 
  • पहले अपने सवालों के जवाब के लिए हम किताबें पढ़ते थे, लोगों से बात करते थे और दिमागी कसरत वाली चीजें करते थे।
  • अब इंटरनेट से तुरंत उसका हल मिल जा रहा है, जिससे दिमाग को मेहनत ही नहीं करना पड़ता। लिहाजा दिमाग की कार्यक्षमता, चीजों को याद रखने की क्वालिटी कम होती जा रही है। 

मोबाइल ने जानकारी पाना तो बेहद आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ हमारी याद रखने की भूमिका भी बदल रही है। याददाश्त मजबूत होने के लिए जानकारी को ध्यान से लेना, उसे समझना और दोबारा याद करना जरूरी होता है। यदि हर बार दिमाग को याद करने की कोशिश करने से पहले ही उत्तर मोबाइल से मिल जाए, तो उस जानकारी को खुद से याद करने का अभ्यास कम हो सकता है।
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स्क्रीनशॉट की आदत कर रही याददाश्त को कमजोर - फोटो : Amarujala.com/AI
बार-बार लिए गए स्क्रीनशॉट से कमजोर होती है याददाश्त

आमतौर पर मोबाइल में आई कोई जरूरी जानकारी, कोई खूबसूरत पल या व्हाट्सएप पर आया कोई काम का मैसेज देखते ही हम सबसे पहले स्क्रीनशॉट लेते हैं। यह स्क्रीनशॉट लेने की आदत आपको सिर्फ वह जानकारी भुलाने में मदद करती है, न कि उस संदेश को याद रखने में सहयोग करती है। 

अमेरिकी बिंघमटन यूनिवर्सिटी के एक नए शोध ने जेन-जी में पनप रही इस आदत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ''डिजिटल एमनीशिया : द आफ्टरमैथ ऑफ अ स्क्रीनशॉट'' नाम के रिसर्च पेपर में इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया है। 
 
  • शोध में सात अलग-अलग प्रयोग कर प्रतिभागियों को डिजिटल डिवाइस पर आर्टवर्क दिखाई। कुछ ने उसे सिर्फ देखा, कुछ ने फोटो खींची, और कुछ ने स्क्रीनशॉट लिया। 
  • जिन लोगों ने सिर्फ देखा, उन्हें बाद में सबसे ज्यादा याद रहा। जिन्होंने फोटो खींची, उनकी याददाश्त कमजोर पड़ी और जिन्होंने स्क्रीनशॉट लिया, उनकी याददाश्त सर्वाधिक प्रभावित हुई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो इसका सैंपल साइज काफी छोटा है, पर स्क्रीनशॉट का आदत के ब्रेन पर प्रभावों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। टेक्नोलॉजी ने हमें कई तरह की सहूलियत जरूर दे दी है, पर जाने-अनजाने हमें इसका बड़ा खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है।

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बढ़ता स्क्रीनटाइम और इसके खतरे - फोटो : Freepik
स्क्रीन टाइम का दिमाग पर हो रहा है असर

सोने से ठीक पहले तक मोबाइल चलाना सिर्फ स्क्रीन देखने की आदत नहीं है। देर रात तक वीडियो, सोशल मीडिया या संदेशों में लगे रहने से सोने का समय पीछे खिसकता जा रहा है और नींद की अवधि प्रभावित हो रही है। जब नींद पूरी नहीं होती तो अगले दिन काम पर ध्यान लगाने, सीखने और जानकारी को संभालने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। 
 
  • इसी तरह हर खाली समय को मोबाइल से भरने से दिमाग को खुद सोचने का मौका कम मिल पाता है। 
  • लिफ्ट में खड़े हैं, बस का इंतजार कर रहे हैं यहां तक कि खाना खाते समय भी मोबाइल चलाने से दिमाग को कभी आराम ही नहीं मिल पाता। 
  • धीरे-धीरे बिना स्क्रीन के बिना कुछ मिनट बिताना मुश्किल लगने लगता है। 
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माता-पिता का ज्यादा स्क्रीन टाइम नुकसानदायक - फोटो : Amarujala.com/AI
बच्चों के विकास पर इसका असर

मोबाइल के दुष्प्रभावों को लेकर अमर उजाला में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था कि छोटे बच्चों को मोबाइल फोन देना उनके जीवन के साथ खेलने जैसा है, पर इससे पहले सभी माता-पिता को भी अपनी इस आदत में सुधार लाने की जरूरत है।

शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि अगर माता-पिता छोटे बच्चों के सामने अक्सर फोन चलाते रहते हैं या लैपटॉप पर काम करते रहते हैं तो ये उनके बच्चों की भाषा सीखने और बोलने की क्षमता पर असर डाल सकता है।

बच्चे के हाथ में मौजूद स्क्रीन ही नहीं, बल्कि वह स्क्रीन भी नुकसानदायक हो सकती है जो हर समय माता-पिता के हाथ में रहती है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


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स्रोत:
Why do we forget the information we screenshot? A new study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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