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Calcium: हड्डी ही नहीं मांसपेशियों के लिए भी जरूरी है कैल्शियम, इसकी कमी सेहत के लिए बढ़ा सकती है मुश्किलें

Sun, 31 Aug 2025 07:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कैल्शियम की कमी का असर हड्डियों में कमजोरी के साथ आपकी मांसपेशियों पर भी दिखता है। जिन लोगों में कैल्शियम कम होता है वो कमजोरी, जल्दी थकान, मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में झुनझुनी या ऐंठन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं।
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कैल्शियम की कमी के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
जब भी हम कैल्शियम का नाम सुनते हैं तो सबसे पहले दिमाग में हड्डियों और दांतों की मजबूती आती है। हमें बचपन से यही सिखाया गया है कि कैल्शियम का मतलब है मजबूत हड्डियां। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैल्शियम सिर्फ हड्डियों तक ही सीमित नहीं है? शोध बताते हैं कि यह खनिज हमारी मांसपेशियों, नसों और दिल की कार्यप्रणाली के लिए भी उतना ही जरूरी है।

कैल्शियम हमारे शरीर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला खनिज है। लगभग 99% कैल्शियम हड्डियों और दांतों में मौजूद होता है। कैल्शियम हमारी मांसपेशियों को सिकोड़ने और ढीला करने, दिल की धड़कन को सामान्य रखने और नसों के जरिए दिमाग से संदेश पहुंचाने जैसे अहम भी काम करता है।

अगर इसकी कमी हो जाए तो शरीर में कई तरह की दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। क्या आप आहार के माध्यम से कैल्शियम की पूर्ति ठीक से कम रहे हैं?
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कैल्शियम शरीर के लिए जरूरी - फोटो : freepik.com
कैल्शियम की कमी का सेहत पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कैल्शियम की कमी का असर हड्डियों में कमजोरी के साथ आपकी मांसपेशियों पर भी दिखता है। जिन लोगों में कैल्शियम कम होता है वो कमजोरी, जल्दी थकान, मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में झुनझुनी या ऐंठन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। लंबे समय तक कमी रहने से ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों के कमजोर होने, दिल की धड़कन में अनियमितता और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी जोखिम बढ़ जाता है।
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आर्थराइटिस का खतरा - फोटो : Freeoik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार कहते हैं, कैल्शियम की कमी का असर सिर्फ हड्डियों पर ही नहीं पड़ता है, इससे मांसपेशियों में भी अकड़न आ सकती है।

कैल्शियम हमारे शरीर के लिए अहम मिनरल है। हमारे कई मसल्स फंक्शन जैसे मसल्स कॉन्ट्रेक्शन, तंत्रिकाओं से सिग्नल ट्रांसमिशन आदि में कैल्शियम अहम भूमिका निभाता है। अगर हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम न हो, तो ब्लड क्लॉटिंग की जटिल प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है।

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मांसपेशियों में दर्द अकड़न का खतरा - फोटो : Adobe
मांसपेशियों की समस्याएं

कैल्शियम मांसपेशियों के संकुचन और उन्हें आराम देने के लिए भी आवश्यक है। जब शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है, तो मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ने लगती है नतीजतन, मांसपेशियों में अकड़न, पैरों में दर्द जैसी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो कैल्शियम की कमी की वजह से पीठ में भी दर्द बढ़ने लगता है। शरीर में कैल्शियम की कमी को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

डॉ. नितिन कुमार कहते हैं, शरीर सही ढंग से काम करे इसके लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है। इसके अलावा नियमित रूप विटामिन-डी का भी सेवन करें। खान-पान में बदलाव करें। रेगुलर वर्कआउट भी उपयोगी साबित हो सकता है।
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हृदय के लिए भी कैल्शियम जरूरी - फोटो : adobe stock photos
कैल्शियम की कमी से होने वाली अन्य दिक्कतें

लंबे समय तक बनी रहने वाली कैल्शियम की कमी का शररी पर कई तरह से असर हो सकता है।
  • कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसमें हल्के झटके या गिरने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है।
  • कैल्शियम दांतों की मजबूती के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी से दांत कमजोर होते हैं, कैविटी और मसूड़ों की समस्या बढ़ती है।
  • कैल्शियम नसों के सिग्नल को पहुंचाने में मदद करता है। ऐसे में इसका कमी होने पर हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या चुभन महसूस हो सकती है।
  • कैल्शियम की कमी वाले लोगों की धड़कन अनियमित हो सकती है और गंभीर स्थिति में इससे हृदय रोगों का भी खतरा रहता है। 
  • बचपन और किशोरावस्था में पर्याप्त कैल्शियम न मिलने पर बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां सही से विकसित नहीं हो पातीं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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