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अध्ययन में दावा: कोरोना संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज इतने महीनों तक रह सकती हैं प्रभावी, शरीर को मिलती है सुरक्षा

Tue, 20 Jul 2021 11:41 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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काफी असरदार हो सकती है कोरोना से बनी एंटीबॉडी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही शरीर में बनी एंटीबॉडीज की प्रभाविकता चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के खिलाफ शरीर में दो प्रकार से एंटीबॉडीज निर्मित हो सकती हैं, पहला- संक्रमण के बाद स्वाभाविक रूप से बनी एंटीबॉडीज और दूसरा- वैक्सीन लगवाने के बाद बनी एंटीबॉडीज। यह एंटीबॉडीज कितने समय तक कोरोना के अगले संक्रमण से सुरक्षित रख सकती हैं? इस संबंध में लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं। इसी से जुड़े हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज  नौ महीने तक प्रभावी रह सकती हैं। गौरतलब है कि अब तक के अध्ययनों में बताया जाता रहा है कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज का प्रभाव तीन से चार महीने में खत्म हो जाता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण रहे हों या वह एसिम्टोमैटिक रहा हो, उसके शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण होता है और वह एंटीबॉडीज करीब 9 महीने तक असरदार तरीके से शरीर में बनी रह सकती हैं।
आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन में बताई गई महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानते हैं।
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एंटीबॉडीज की प्रभाविकता पर अध्ययन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
नौ महीने तक प्रभावी रह सकती हैं संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज
इटली में यूनवर्सिटी ऑफ पाडुआ और ब्रिटेन में इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पिछले साल फरवरी और मार्च में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए इटली के ‘वोओ’ के 3000 निवासियों में से 85 प्रतिशत के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसके बाद नवंबर 2020 में एक बार फिर से इन लोगों में एंटीबॉडी की जांच की गयी। इस अध्ययन को ‘नेचर कम्युनिकेशन’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने जांच के दौरान पाया कि करीब 9 महीने पहले कोरोना की चपेट में आए ज्यादातर लोगों में अब भी प्रभावी एंटीबॉडीज मौजूद थीं।
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करीब 9 महीने तक शरीर में बनी रह सकती हैं एंटीबॉडीज - फोटो : Pixabay
बिना लक्षण वाले लोगों में भी पाई गईं एंटीबॉडीज
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि फरवरी और मार्च में संक्रमण की चपेट में आए करीब 99 फीसदी लोगों में नवंबर तक एंटीबॉडी प्रभावी रूप से कायम थी। खास बात यह रही कि जिन लोगों में कोरोना के एसिम्टोमैटिक मामले थे उनमें भी एंटीबॉडी का स्तर समान ही पाया गया। अध्ययन की प्रमुख लेखक इलारिया डोरिगटी कहती हैं, हमें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि लक्षण वाले या बिना लक्षण वाले लोगों में एंटीबॉडी का स्तर अलग-अलग हो। इससे संकेत मिलता है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, लक्षण या बीमारी की गंभीरता पर निर्भर नहीं करती है। आपमें कोरोना के भले ही जिस स्तर का संक्रमण रहा हो, उससे शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडीज विकसित हो सकती हैं।

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लंबे समय तक मिल सकती है कोरोना के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर हो सकता है भिन्न
प्रोफेसर इलारिया डोरिगटी कहती हैं, हमने अध्ययन में यह जरूर पाया है कि लोगों में विकसित एंटीबॉडीज का स्तर जरूर अलग-अलग हो सकता है। यह मुख्यरूप से अलग-अलग व्यक्तियों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है। हमें अध्ययन के दौरान कुछ लोगों में एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा हुआ भी देखने को मिला, इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि ऐसे लोग वायरस से दोबारा संक्रमित हुए होंगे, पर चूंकि उनके शरीर में पहले से ही पर्याप्त एंटीबॉडीज मौजूद थीं इसलिए उन्हें इसका विशेष पता नहीं चला होगा।
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कोरोना से संक्रमित सभी लोगों के शरीर में बनती हैं एंटीबॉडी - फोटो : ट्विटर
10 माह बाद कम हो सकती हैं संक्रमण से निर्मित एंटीबॉडीज
यूनिवर्सिटी ऑफ पाडुआ के प्रोफेसर एनिरको लावेजो ने कहते हैं, जांच के दौरान हमने पाया कि मई तक इटली के ‘वोओ’ शहर की करीब चार फीसदी आबादी संक्रमित हो चुकी थी, हालांकि उनमें से बहुत से लोगों को खुद के संक्रमित होने की जानकारी ही नहीं थी, ज्यादातर लोगों में किसी तरह के लक्षण नहीं थे। अध्ययन के फॉलो-अप में संक्रमण के 10 महीने के बाद किए गए जांच में हमने पाया कि कुछ लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर कम हो रहा था, इस आधार पर कहा जा सकता है कि संक्रमण के बाद नौ महीने तक शरीर में एंटीबॉडीज प्रचुर मात्रा में कायम रह सकती हैं। 

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स्रोत और संदर्भ: 
COVID-19 antibodies persist at least nine months after infection

अस्वीकरण नोट: यह लेख ‘नेचर कम्युनिकेशन’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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