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Coronavirus: त्वचा पर इतने घंटे जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस, शरीर के तापमान का भी असर

Thu, 08 Oct 2020 10:30 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस को लेकर हुए कई शोध हुए हैं - फोटो : Pixabay
कोरोना महामारी का संक्रमण देश और दुनिया में हर दिन बढ़ रहा है। इस महामारी पर नियंत्रण के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इस वायरस की प्रकृति से लेकर प्रभाव और इलाज के उपायों पर भी शोध हो रहे हैं। कोरोना वायरस को लेकर हुए कई शोध हुए हैं, जिनमें यह बताया जा चुका है कि कपड़े, लकड़ी, धातु आदि विभिन्न तरह की सतहों पर वायरस कितनी देर तक रह सकता है। लेकिन ज्यादातर शोधों में यह बात सामने नहीं आई थी कि यह वायरस इंसानों की त्वचा पर कितनी देर जीवित रहता है। अब जापान के वैज्ञानिकों ने भी इस विषय में शोध किया है और हाथों की साफ-सफाई को लेकर सलाह भी दी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
प्रयोगशाला परीक्षण के जरिए वैज्ञानिकों ने इन्फलुएंजा और कोरोना वायरस के त्वचा पर ठहरने का तुलनात्मक अध्ययन किया है। शोध के हवाले से वैज्ञानिकों ने नतीजा निकाला है कि हमारी त्वचा कोरोना वायरस की सबसे बड़ी वाहक हो सकती है। जापान की क्योटो प्रीफेक्चरल यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन ने अपनी रिसर्च में यह भी दावा किया है कि इंफ्लुएंजा-ए की तुलना में कोरोना वायरस चार गुना अधिक समय तक जिंदा रह सकता है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : पिक्साबे
इस शोध के लिए फॉरेंसिक अटॉप्सी के जरिए इंसान की त्वचा के नमूने लिए गए। त्वचा की कोशिकाओं को कोरोना वायरस और इंफ्लुएंजा-ए के नमूनों के साथ मिक्स किया गया। शोध में सामने आया कि स्किन पर फ्लू का वायरस करीब दो घंटे तक जिंदा रहा, जबकि कोरोना वायरस नौ घंटे तक जिंदा रहा। यह इतने समय तक स्किन पर कैसे जिंदा रह लेता है, इसका पता नहीं लगाया जा सका है। 

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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं के मुताबिक जब नमूनों में रेस्पिरेट्री टैक्ट से लिया गया म्यूकस डाला गया तो कोरोना वायरस 11 घंटे तक जिंदा रहा। हालांकि इन पर  80 फीसदी अल्कोहल वाला हैंड सैनेटाइजर का प्रयोग करने पर वायरस 15 सेकंड के अंदर खत्म हो गए। शोध में बताया गया कि त्वचा पर वायरस का इतने समय के लिए रहना खतरे को बढ़ाता है। इसलिए साबुन से हाथों को कम से कम 20 सेकंड के लिए धोना जरूरी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इंफ्लुएंजा-ए वायरस के मुकाबले कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। सीडीसी की गाइडलाइन के मुताबिक, 60 से 95 फीसदी तक एल्कोहल वाले सैनेटाइजर से कम से कम 20 सेकंड तक हाथों को सैनिटाइज करना जरूरी है। या फिर साबुन-पानी से हाथों को धोना जरूरी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
तापमान की रहती है भूमिका
इससे पहले यूएस आर्मी मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंफेक्शियस डिजीज ने जुलाई में शोध किया था, जिसमें बताया गया था कि हाथ की त्वचा पर कोरोना वायरस आठ घंटे से 14 दिनों तक रह सकता है। त्वचा पर वायरस के सक्रिय रहने में तापमान की बड़ी भूमिका होती है। यह शोध 'क्लीनिकल इंफेक्शीसियस डिजीज' में प्रकाशित किया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोध के मुताबिक, हमारे शरीर या त्वचा का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस हो तो कोरोना वायरस आठ घंटे तक सक्रिय रह सकता है। वहीं, अगर उसे बाह्य कारणों से भी त्वचा पर 22 डिग्री सेल्सियस का तापमान मिले तो उसके ठहरने का समय 22 घंटे हो सकता है, जबकि चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर कोरोना वायरस 14 दिनों तक सक्रिय रह सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोध के मुताबिक, जब 80 फीसदी एथनॉल वाले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया गया तो दोनों ही तरह के वायरस (इन्फलुएंजा और कोरोना) 15 सेकंड के अंदर निष्क्रिय हो गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि 80 फीसदी एल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल वायरस को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही मारने में कारगर है। उनका यह भी कहना है कि साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोना भी प्रभावी है। शोधकर्ताओं ने नियमित तौर पर हाथों की साफ-सफाई करते रहने की सलाह दी। 
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