आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। देर रात तक मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया पर रील्स देखना, ऑनलाइन गेम खेलना और काम का बढ़ता दबाव लोगों की नींद को प्रभावित कर रहा है। इसका असर केवल दिनभर की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एकाग्रता, याददाश्त और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। पर्याप्त नींद न मिलने से बच्चों की पढ़ाई और युवाओं की काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित करता है और याददाश्त को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसलिए अच्छी नींद को स्वस्थ मस्तिष्क के लिए भी जरूरी माना जाता है। वयस्कों को आमतौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
मसलन अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो इसका असर ब्रेन हेल्थ पर भी पड़ सकता है।