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आपका भी डॉक्टर इंटरनेट तो नही? इस्तेमाल करें, लेकिन सावधान रहना जरूरी

Sat, 21 Dec 2019 03:56 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
इंटरनेट ने लोगों के जीवन को आसान बना दिया है। कुछ मायने में यह मददगार तो साबित हो रहा है, पर जब हम इसका उपयोग बीमारियों के इलाज के लिए करने लगते हैं, तो कई बार यह मुसीबत में डाल देता है। आइए जानते हैं, वरिष्ठ नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. किशोर कुमार से इस बारे में विस्तार से: 

आज के युग में अधिकांश लोग किसी भी तरह की जानकारी के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में एक दंपति तीन साल की अपनी बेटी को दिखाने के लिए मेरे पास आया। वह बहुत चिंतित और घबराया हुआ था। उसने कहा कि वह पिछले एक हफ्ते से बेटी को मुझे दिखाने के लिए इंतजार कर रहा था। मैंने दंपति से पूछा कि लड़की को समस्या क्या है? उसने बताया कि लड़की के गर्दन के किनारे एक गांठ है। मैंने बच्ची की जांच की और कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। उसे हल्का जुखाम है, जिससे गले में संक्रमण हो गया है। इस पर माता-पिता ने जो राहत की सांस ली, वह अविश्वसनीय थी।
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health - फोटो : pixa
मेरे पूछने पर दंपति ने बताया कि उसने इंटरनेट पर गर्दन में गांठ की समस्या को सर्च किया था, जिसमें पता लगा कि बच्चे को ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) या लिम्फोमा (लिम्फ नोड कैंसर) हो सकता है। मैं आसानी से कई टेस्ट कराने को लिख सकता था, लेकिन मैंने माता-पिता को आश्वस्त किया कि अगर गले के संक्रमण का इलाज करने के बाद लिम्फ नोड में इजाफा होता है, तो मैं एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) का सुझाव दूंगा, जो बायोप्सी का एक रूप है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
जब हम अस्वस्थ महसूस करते हैं, तो हममें से कई लोगों को इंटरनेट पर अपने रोग के लक्षणों को समझने की आदत होती है, क्योंकि हम डॉक्टर के पास जाना पसंद नहीं करते। अपने रोग के लक्षणों को इंटरनेट पर सर्च करने की इस समस्या को 'साइबरचोंड्रिया' कहा जाता है, जो एक बढ़ती समस्या बनती जा रही है। मरीज अक्सर यह जानना चाहते हैं कि उनकी समस्या पर इंटरनेट डॉक्टर का क्या कहना है? आंख मलना? पेट में अजीब सा दर्द? पैर की ऐंठन? क्या यह एक गंभीर बीमारी का लक्षण है? इस मामले में इंटरनेट डॉक्टर से पूछने के लोभ से सावधान रहें।

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सांकेतिक चित्र - फोटो : Social Media
इंटरनेट पर अपने स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान से देखना और उसका उपाय खोजना निश्चित रूप से स्वास्थ्य में सुधार करने के बुरे तरीके हैं। यह समस्या के लक्षणों को जरूरत से ज्यादा समझकर गलत दवा लेने या गलत स्व-उपचार में उलझाने की ओर ले जाता है। आप लक्षणों को कम आंकते हैं और स्थिति को खराब होने देते हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें इस बात की अत्यधिक चिंता रहती है कि आप बीमार हैं। मरीजों की यह समझना चाहिए कि हर मरीज की स्थिति अलग-अलग होती है। हल्के से गंभीर बीमारी तक के लक्षणों के आधार पर इसे अलग-अलग तरीके से नियंत्रित किया जाता है। इसलिए हमेशा यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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internet - फोटो : amar ujala
सरल शब्दों से शुरू करें
इंटरनेट पर जब भी आप कुछ सर्च करें तो मूल शब्द डालकर ही खोजें। सिर दर्द और मस्तिष्क ट्यूमर जैसे नैदानिक शब्दों को जोड़ने के बजाय सिर दर्द जैसे मूल कीवर्ड का उपयोग करके खोज करना बेहतर होता है। परेशानी की स्थिति में गुगलिंग करना आपकी मनःस्थिति को पूर्वाग्रहीत कर सकता है। यह आपको बहुत सी साइटें प्रदान करेगा, जो निराधार आशंकाओं की पुष्टि कर सकती हैं या कई बार लक्षणों की गंभीरता को कम कर सकती हैं (जिससे आप डॉक्टर को दिखाने में देरी कर सकती हैं, जबकि आपको इसकी जरूरत है)।

ज्यादा लंबे वाक्य न लिखें
आम तौर पर पेट का दर्द टाइप न करके पेट दर्द टाइप करें और विश्वसनीय चिकित्सा साइटों पर सर्च करें। यहां कई ऐसी चिकित्सा साइटें हैं, जो अधिक उपयोगी जानकारी प्रदान करेंगी।
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internet - फोटो : amar ujala
वेबसाइटों की प्रामाणिकता
EDU से समाप्त होने वाली साइटें अकादमिक संस्थानों की होती हैं और उनमें अंत में .in होता है। सरकारी साइटें जैसे cdc.gov विश्वसनीय स्रोत हैं। इंटरनेट खोज के परिणाम पृष्ठों के बहुत ऊपर और नीचे दिखाई देने वाले लिंक से सावधान रहें। ये प्रायोजित लिस्टिंग है और इन्हें लेबल किया गया है।
अपनी खोज को तुरत बंद न करें
चिकित्सा संबंधी जानकारी के लिए अपनी खोज केवल एक लिंक पर समाप्त नहीं करनी चाहिए। उदाहरण के लिए यदि जबड़े के दर्द के लिए पहला खोज परिणाम आपको यह महसूस करने में मदद करता है कि आपका दर्द एक दंत समस्या हो सकती है, तो अधिक विशिष्ट जानकारी के लिए आप अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन की वेबसाइट (ada.org) पर एक और खोज कर सकती हैं।
 
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Internet - फोटो : Flickr
कोई भी ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित कर सकता है जब आप इंटरनेट पर अपनी बीमारी के लक्षणों को खोजती हैं, तो सर्च इंजन उपयोग किए गए शब्दों से मेल खाने वाले परिणामों को जोड़ने की पूरी कोशिश करता है। आपके खोजे गए परिणाम को एक प्रतिष्ठित चिकित्सा साइट बदल सकती है, जो बहुमूल्य जानकारी प्रदान करती है, लेकिन विकिपीडिया के लेख, कोई खुला मंच या किसी के व्यक्तिगत ब्लॉग को भी बदला जा सकता है। ये स्रोत गलत हो सकते हैं और (अधिक नहीं होने की संभावना) किसी मेडिकल प्रोफेशनल द्वारा इस विषय पर सलाह देने के लिए क्रेडेंशियल या अनुभव के साथ प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री की गुणवत्ता और विश्वसनीयता के लिए कोई भी दावा नहीं कर सकता है।

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online - फोटो : Unsplash
इंटरनेट सर्चिग स्वास्थ्य चिंता का कारण
इंटरनेट पर बहुत ज्यादा खोज करने से भी गंभीर चिंता हो सकती है। खासकर, उन लोगों को, जो पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से डरते हैं। आजकल यह चिंता अक्सर होती है। इसका एक नाम है- 'साइबरचोंड्रिया'। ऐसे लोग जुनूनी हो सकते हैं और जानकारी के लिए वेब की जांच में जितना समय बिताते हैं, वह उनके दैनिक जीवन के कामों में बाधा पहुंचा सकता है। वजह, इंटरनेट पर उपलब्ध लेख स्वास्थ्य के मुद्दों के छोटे से लेकर गंभीर मामलों तक में सब कुछ कवर करते हैं। ऐसे में इन लोगों को अपने लक्षणों को अतिरंजित करना आसान हो जाता है और वे खुद को विश्वास दिलाते हैं कि उनकी स्थिति वास्तव में बहुत खराब है। 

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health tips
इन बातों का रखें ध्यान
  •  इससे पहले कि आप अपने इंटरनेट डॉक्टर की मदद से प्राप्त स्वज्ञान से कुछ करें, ध्यान रखें कि चिकित्सा का अध्ययन एक केकवॉक नहीं है। आपके चिकित्सक शारीरिक रूप से सिर दर्द के ऑनलाइन पॉप क्विज की तुलना में समस्या के लक्षणों को बेहतर तरीके से देख और जांच सकते हैं।
  • आप रोग के लक्षणों को अलग-अलग सर्च इंजन में दर्ज करते हैं और एक ही परिणाम प्राप्त करते हैं। तब आप बीमारी पर पढ़ते हैं और स्वयं को समझाते हैं कि यह वही होना चाहिए, जो आपको है।
  • यदि आप ऑनलाइन लक्षणों का निदान करना जारी रखते हैं, तो ऐसी संभावना है कि बीमारी के उपचार में देरी करेंगे, जो उचित चिकित्सा के अभाव में लंबे समय तक हो सकता है। कभी-कभी इलाज मुश्किल भी होता है। यह सब एक मरीज का आकलन करने और यह जानने के लिए है कि किन संभावनाओं पर विचार किया जाए और किन पर छूट दी जाए।
  • रोग के लक्षणों को इंटरनेट पर सर्च नहीं करने की सलाह देने के कारणों में से एक यह भी है कि एक ही लक्षण एक व्यक्ति में कम हो सकता है, लेकिन दूसरे व्यक्ति में गंभीर। ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर की सलाह और दवा महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि हमारे शरीर की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चिकित्सा में कई चीजें मानकीकृत नहीं हैं।
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health-insurance - फोटो : Pixabay
इन बातों का रखें ध्यान
  • कई बार जब मैं पैरासिटामोल लिखता हूं, तो बहुत सारे माता-पिता भ्रमित होते हैं। वे कहते हैं कि मेरे बच्चे को बुखार नहीं है। लेकिन मैं समझाता हूं कि पैरासिटामोल में एंटी-पायरेटिक (बुखार), एनाल्जेसिक (दर्द के लिए) और एंटी-इनफ्लामेट्री प्रभाव है। क्या आप जानते हैं कि मैं आपको यह किसलिए दे रहा हूं?
  • उन जानकारियों की तलाश करें, जो विशेषज्ञों को उद्धृत करती हैं या विषय क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा लिखी जाती हैं (या दोनों)। यह आमतौर पर विश्वसनीय होती हैं।
  • जब भी संभव हो, अध्ययन की पूरी रिपोर्ट पढ़ें और अध्ययन के परिणामों को सत्यापित करने के लिए निष्कर्ष की तलाश करें।
  • ऑनलाइन जानकारी साझा किए जाने की तारीख जांचें। विशेष रूप से पोषण और चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है। 10 वर्ष से अधिक पुराने अध्ययनों की तलाश करें, लेकिन जब आप अपनी वर्तमान स्थिति के लक्षणों के बारे में उत्तर खोज रहे हैं, तो पांच वर्ष से ज्यादा पुराने अध्ययन को न पढें।
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