How to Protect Children From Pollution: देशभर के कई बड़े शहरों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली-एनसीआर है। दिल्ली के कई हिस्सों में एक्यूआई 300 से अधिक है। वायू प्रदूषण इतना अधिक स्तर सभी लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन इसका गहरा और गंभीर असर बच्चों के स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है।
छोटे बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, और उनकी श्वसन दर वयस्कों की तुलना में अधिक होती है, इसलिए वे प्रदूषक कणों (खासकर PM2.5) को ज्यादा मात्रा में सांस लेते हैं। शोध बताते हैं कि जहरीली हवा केवल वर्तमान की स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह गर्भ में पल रहे भ्रूण तक को प्रभावित कर सकती है, जिससे समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर बर्थ) और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं हो रही हैं।
प्रदूषण के कारण बच्चों में न केवल अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे श्वसन संक्रमणों का खतरा बढ़ता है, बल्कि यह उनके दिमागी विकास को भी प्रभावित करता है, जिससे आगे चलकर एकाग्रता में कमी और कम बुद्धिमत्ता जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। यह प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत गंभीरता से प्रभावित करता है, ऐसे में इसके लिए माता-पिता को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।