एक-दो दशक पहले तक हड्डियों की समस्या को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोगों में ये काफी तेजी से बढ़ती दिक्कत बन गई है। डॉक्टर्स बताते हैं, 25-40 की आयु वाले अधिकतर युवा हड्डियों की समस्या, आर्थराइटिस, बोन डेंसिंटी में कमी के शिकार पाए जा रहे हैं, जो न सिर्फ उनके लिए गंभीर दिक्कतों को बढ़ाने वाली हो सकती है साथ ही दीर्घकालिक तौर पर भी इसका जोखिम काफी अधिक हो सकता है, जिसमें क्वालिटी ऑफ लाइफ बिगड़ने का खतरा रहता है।
अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि युवाओं में हड्डियों से संबंधित समस्याएं पिछले 10-15 वर्षों से अधिक देखी जा रही है, पर कोरोना महामारी के दौरान इसका जोखिम अधिक हो गया है। इसके लिए जिन कारणों को प्रमुख माना जा रहा है उनमें वर्क फ्रॉम होम के दौरान लंबे समय तक बैठने की स्थिति शीर्ष पर है।
सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को पूरे शरीर के लिए कई प्रकार के दुष्प्रभावों का कारण माना जाता रहा है।