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Stress: अक्सर बनी रहती है पाचन की समस्या? कहीं बहुत ज्यादा तनाव में तो नहीं रहते हैं आप

Thu, 11 Jul 2024 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाचन स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : istock
स्ट्रेस और एंग्जाइटी सामान्य स्थिति है जो नकारात्मक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है। हालांकि यदि आपको अक्सर ही तनाव बना रहता है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ज्यादा तनाव लेने से सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं, शारीरिक सेहत पर भी नकारात्मक असर होने लगता है।

तनाव होना जीवन के अनुभवों के प्रति एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। ये समस्या किसी को भी हो सकती है। काम और परिवार जैसी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से लेकर जीवन की गंभीर घटनाओं जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु तक कुछ भी तनाव को ट्रिगर कर सकता है। वैसे तो तत्काल या अल्पकालिक स्थितियों के लिए तनाव आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है हालांकि अगर अक्सर ही ये समस्या बनी रहती है तो सावधान हो जाने की जरूरत है। 

लंबे समय तक बने रहने वाले मानसिक तनाव को आमतौर पर डिप्रेशन जैसी समस्याओं का कारक माना जाता है पर क्या आप जानते हैं कि ये हृदय रोग, प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या, पाचन विकारों का भी कारण बन सकती है?

आइए जानते हैं कि तनाव के कारण किन स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है?
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तनाव की स्थिति - फोटो : istock
तनाव की स्थिति का शरीर पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जब आप तनाव महसूस करते हैं, तो शरीर कुछ खास हार्मोन्स रिलीज करता है। हार्मोन वे रासायनिक संकेत हैं जिनका उपयोग आपका शरीर पूरे शरीर के सिस्टम को यह बताने के लिए करता है कि किस समय क्या करना है? तनाव प्रतिक्रिया के दौरान, आपका शरीर हृदय गति, श्वास दर और रक्तचाप को बढ़ाकर समस्या से निपटने के लिए प्रयास करता रहता है।

आइए जानते हैं कि लंबे समय तक बनी रहने वाली तनाव की स्थिति का शारीरिक स्वास्थ्य पर किस तरह से असर होता है?
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पाचन विकारों का खतरा - फोटो : istock
हो सकती है पाचन की समस्या

तनाव के दौरान आपका लिवर शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए अतिरिक्त रक्त शर्करा (ग्लूकोज) का उत्पादन करने लगता है। अगर आप लगातार तनाव में हैं, तो आपका शरीर इस अतिरिक्त ग्लूकोज की वृद्धि को नियंत्रित करने में विफल हो जाता है जिससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसी तरह स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने से तेजी से सांस लेने और हृदय गति का बढ़ने का भी खतरा रहता है जिससे आपके पाचन तंत्र पर असर सकता है। पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने के कारण आपको हार्टबर्न या एसिड रिफ्लक्स होने की दिक्कत अधिक हो सकती है। 

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सांस की समस्या - फोटो : istock
श्वसन और हृदय प्रणाली पर असर

स्ट्रेस हार्मोन की अधिकता आपके श्वसन और हृदय प्रणाली को प्रभावित करने लगती है। तनाव प्रतिक्रिया के दौरान, आपका शरीर ऑक्सीजन युक्त रक्त को तेजी से वितरित करने के प्रयास में तेजी से सांस लेने का संकेत देता है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा या सांस लेने की समस्या है, उनके लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 

इसके अलावा तनाव के दौरान आपका दिल भी तेजी से धड़कता है। स्ट्रेस हार्मोन की अधिकता रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकती है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हृदय रोगों की अन्य समस्याओं का भी खतरा हो सकता है।
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तनाव की स्थिति - फोटो : istock
लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव का असर

लगातार बनी रहने वाली तनाव की स्थिति कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि अवसाद, चिंता और व्यक्तित्व विकार।
  • हृदय रोग और इसके कारक जैसे उच्च रक्तचाप, असामान्य हृदय गति, दिल का दौरा और स्ट्रोक।
  • मोटापा और खाने के अन्य विकार।
  • मासिक धर्म संबंधी समस्याएं।
  • यौन रोग जैसे कि पुरुषों में नपुंसकता और शीघ्रपतन और महिलाओं में यौन इच्छा में कमी।
  • त्वचा और बालों की समस्याएं जैसे कि मुंहासे होना, एक्जिमा और स्थायी रूप से बालों का झड़ना।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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