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गुड न्यूज: कीमोथेरेपी से सीएआर-टी तक, 30 साल में कितना बदल गया ब्लड कैंसर का इलाज

Tue, 29 Sep 2026 07:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले दो-तीन दशकों में ब्लड कैंसर का इलाज काफी बदल गया है। पहले मुख्य रूप से कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर निर्भरता थी। अब टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। इन तकनीकों ने ब्लड कैंसर में इलाज के परिणाम बेहतर किए हैं।
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कैंसर मरीजों के लिए अच्छी खबर - फोटो : Amarujala.com/AI
एक समय था जब ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और परिवार के सामने इलाज को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती थी। इलाज के विकल्प सीमित थे और मुख्य रूप से भारी कीमोथेरेपी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में मेडिकल साइंस में तेजी से बदलाव आया है।

आज ब्लड कैंसर के इलाज में ऐसी तकनीकें शामिल हो चुकी हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बनाती हैं। टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी ने इलाज की तस्वीर बदल दी है।


इम्यूनोथेरेपी: शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता से कैंसर पर हमला

इम्यूनोथेरेपी ऐसी आधुनिक उपचार पद्धति है, जिसमें मरीज की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय किया जाता है। कई मामलों में इसे कीमोथेरेपी के साथ भी दिया जाता है, ताकि इलाज का असर बेहतर हो सके।

क्लासिक हॉजकिन लिंफोमा जैसे कुछ ब्लड कैंसर में इम्यूनोथेरेपी से इलाज के परिणामों में बड़ा सुधार देखा गया है। इस तकनीक ने कैंसर के खिलाफ शरीर की अपनी सुरक्षा व्यवस्था को इलाज का हिस्सा बना दिया है।

टार्गेटेड थेरेपी: कैंसर की खास कमजोरी पर सीधा वार

पारंपरिक कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं के साथ शरीर की कुछ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। टार्गेटेड थेरेपी का तरीका इससे अलग है। इसमें कैंसर पैदा करने वाले खास जीन या प्रोटीन को पहचानकर उन्हें निशाना बनाया जाता है।
 
  • क्रोनिक मायलॉयड ल्यूकेमिया यानी सीएमएल इसका बड़ा उदाहरण है। 90 के दशक से पहले यह बीमारी बेहद जानलेवा मानी जाती थी। लेकिन इमैटिनिब यानी ग्लिवेक जैसी दवाओं के आने के बाद कई मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।
  • क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया यानी सीएलएल में भी पहले ज्यादा कठिन कीमोथेरेपी पर निर्भरता थी। अब टार्गेटेड दवाओं के रूप में गोलियों ने इलाज के विकल्प बढ़ाए हैं।

इसी तरह एएमएल-एम3 में भी बड़ा बदलाव आया है। 70-80 के दशक में इसे लगभग 100 प्रतिशत घातक माना जाता था, लेकिन टार्गेटेड दवाओं की मदद से आज यह पूरी तरह ठीक होने योग्य ब्लड कैंसर बन चुका है।
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कैंसर का इलाज - फोटो : Freepik.com
बोन मैरो ट्रांसप्लांट में भी बढ़े विकल्प

इलाज की तकनीक सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं रही है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है। अब हाफ-मैच यानी आधे डीएनए वाले डोनर से भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इससे ऐसे मरीजों के लिए डोनर मिलने की संभावना बढ़ गई है, जिन्हें पहले सही मैच मिलने में परेशानी होती थी।

सीएआर-टी सेल थेरेपी ब्लड कैंसर के इलाज में एक नई और बेहद खास तकनीक के रूप में सामने आई है। इसे एक तरह की 'लाइव ड्रग' भी कहा जाता है।

इस उपचार में मरीज के खून से टी-सेल्स यानी रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं निकाली जाती हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से इन कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करने के लिए तैयार किया जाता है। फिर इन्हें मरीज के शरीर में वापस डाला जाता है।खास बात यह है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए भी इलाज का विकल्प बन रही है, जिन पर कीमोथेरेपी का असर नहीं हुआ या बीमारी दोबारा लौट आई।


बदल गई ब्लड कैंसर के इलाज की तस्वीर

पिछले कुछ दशकों में ब्लड कैंसर का इलाज सिर्फ भारी कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं रहा। टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी ने इलाज के नए रास्ते खोले हैं। सही समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज मिलने पर आज कई मरीज लंबे समय तक बेहतर जीवन जी सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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