Medically Reviewed by Dr. Charudutt Kalamkar
डॉ चारुदत्त कलमकर ,नेत्र सर्जन व डायरेक्टर,
श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल , रायपुर , छत्तीसगढ़
डिग्री- एमबीबीएस, एमएस, ऑप्थेल्मोलॉजी
अनुभव-15 वर्ष से अधिक
ऑक्युलर प्रोबोथोसिस या नकली आंखें उन लोगों को लगाई जाती है जिन्होंने अपनी आंखें किसी कारणवश खो दी हों। कभी-कभी एक आंख सिकुड़ कर छोटी हो जाती है या कुछ वजहों से जन्म के बाद विकसित नहीं हो पाती है। कई बार किसी ट्रॉमा, सर्जरी या कैंसर के कारण भी ऐसी स्तिथि उत्पन हो जाती है। इससे न केवल खूबसूरती पर असर पड़ता है पर इसका दर्द उनके व्यक्तित्व में झलकने लगता है। आर्टिफीशियल आई लगवाकर मरीज न केवल बाहरी रूप सुधर लेते हैं बल्कि आत्मविश्वास से भर उठते हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए आर्टिफिशियल आई से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें।