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सलाह: थायरॉयड से बचने के ये हैं दमदार घरेलू उपाय, मिलेगा जल्द आराम

Wed, 14 Apr 2021 04:12 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 


तितली के आकार की थायरॉयड ग्रंथि शरीर की अधिकांश मेटाबॉलिक प्रोसेस को नियंत्रित करती है। थर्मोरेग्यूलेशन, हार्मोनल फंक्शन और वजन का नियंत्रण इस ग्रंथि के कुछ महत्वपूर्ण कार्य हैं। थायरॉयड वैसे तो आज के समय की एक आम समस्या है, लेकिन यह अधिकांश लोगों में देखने को मिल रही है। भारत में तो लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। हालांकि जो लोग थायरॉयड की समस्या से पीड़ित हैं, वे इस समस्या से निपटने के लिए कुछ घरेलू उपचार का सहारा ले सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नारियल का तेल 
  • नारियल के तेल में फैटी एसिड होते हैं जो थायरॉयड ग्रंथि के सही कामकाज में मदद करते हैं। नारियल तेल का संतुलित उपयोग वजन कम करने में मदद करता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और शरीर के तापमान को संतुलित करता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एप्पल (सेब) साइडर विनेगर 
  • यह हार्मोन के संतुलित उत्पादन में मदद करता है। शरीर के वसा को नियंत्रित करने, शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक है। इसे शहद और पानी में मिलाकर लिया जा सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अदरक 
  • अदरक पौटेशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिजों में समृद्ध है और इन्फ्लेमेशन से निपटने में मदद करता है। अदरक की चाय लेना सबसे आसान है। यह थायरॉयड की समस्या में लाभ पहुंचा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विटामिन बी 
  • थायरॉयड की समस्या के कारणों से लड़ने में विटामिन मदद करते हैं। थायरॉयड फंक्शन के लिए बी फैमिली के विटामिन जरूरी हैं। विटामिन बी 12 हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों की मदद करने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। रोजाना अंडे, मांस, मछली, फलियां, दूध और अखरोट शामिल करना, विटामिन बी की स्थिर आपूर्ति के साथ मदद कर सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
 विटामिन डी 
  • विटामिन डी की कमी से थायरॉयड की समस्या हो सकती है। शरीर इसे केवल सूरज के संपर्क में आने पर ही पा सकता है, इसलिए रोजाना 15 मिनट धूप लें। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होगी। कुछ खाद्य पदार्थ जो विटामिन डी से भरपूर होते हैं, वे हैं डेयरी उत्पाद, तिल, संतरे का रस और अंडे की जर्दी। यदि शरीर में विटामिन डी का स्तर बहुत कम है, तो सप्लीमेंट्स आवश्यक होगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
बादाम 
  • थायरॉयड के स्वास्थ्य के लिए बादाम सबसे उपयुक्त हैं। यह प्रोटीन, फाइबर और खनिजों का एक अच्छा स्रोत है। बादाम में सेलेनियम होता है जो थायरॉयड हेल्दी न्यूट्रिएंट है। यह मैग्नीशियम में भी बहुत समृद्ध है जो थायरॉयड ग्रंथि को आराम से काम करने में मदद कर सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
दूध और इससे बने पदार्थ 
  • दूध, पनीर और दही थायरॉयड के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये आयोडीन में उच्च होते हैं जो थायरॉयड के सही तरह से काम के लिए आवश्यक है। यह विटामिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करेंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixbay
बीन्स 
  • बीन्स फाइबर, प्रोटीन, आवश्यक खनिज और विटामिन से भरपूर होते हैं। यह एंटी-ऑक्सिडेंट और जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। फाइबर अधिक होने से यह कब्ज से निपटने में मदद करता है जो हाइपोथायरायडिज्म का एक आम दुष्प्रभाव है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अलसी का बीज 
  • अलसी का बीज अच्छे फैटी एसिड से भरपूर होते हैं जो दिल और थायरॉयड के लिए अच्छे होते हैं। मैग्नीशियम और विटामिन बी 12 से भरपूर, अलसी का बीज हाइपोथायरायडिज्म से लड़ते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
 नियमित व्यायाम 
  • थायरॉयड फंक्शनिंग को अच्छा बनाए रखने के सबसे महत्वपूर्ण है नियमित व्यायाम। दवाएं और प्राकृतिक उपचार ठीक हैं, लेकिन इसे उचित व्यायाम के साथ जोड़ा जाना चाहिए। नियमित व्यायाम हार्मोनल संतुलन में मदद करता है और बेहतर वजन के नियंत्रण में काम आता है जो थायरॉयड की समस्याओं से निपटने में मदद करता है।  
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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