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Study: स्ट्रेस-एंग्जाइटी होगी दूर, आपके घर में मौजूद है असरदार दवा वो भी फ्री; वैज्ञानिकों ने किया प्रमाणित

Sun, 17 Aug 2025 09:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • एक अध्ययन से पता चला है कि 77% भारतीय नियमित रूप से तनाव के कम से कम एक लक्षण का अनुभव करते हैं।
  • स्ट्रेस की समस्या से परेशान  लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। शोध से पता चलता है कि तुलसी का सेवन कोर्टिसोल को 36% तक कम कर सकती है, ऐसे में तनाव से बचे रहने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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तनाव, स्ट्रेस से आप भी हैं परेशान? - फोटो : Freepik.com
Mental Health: दौड़भाग वाली इस दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेस-एंग्जाइटी का शिकार हो सकता है। एक अध्ययन से पता चला है कि 77% भारतीय नियमित रूप से तनाव के कम से कम एक लक्षण का अनुभव करते हैं। वहीं अन्य सर्वेक्षणों से पता चला है कि हर 2 में से 1 शहरी भारतीय स्ट्रेस का शिकार हो सकता है, इसका असर उनके दैनिक जीवन पर पड़ता है। युवा पीढ़ी, खासकर जेनरेशन जेड में इसका खतरा और भी अधिक देखा जा रहा है। 

अगर आप भी अक्सर तनाव का शिकार रहते हैं, काम पर फोकस नहीं बन पाता है, चिड़चिड़ापन परेशान कर रहा है तो इसपर समय रहते ध्यान देकर इलाज जरूर कराएं। दीर्घकालिक स्थितियों में इससे डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रेस की समस्या से परेशान लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों की टीम ने एक अध्ययन में ऐसे कारगर उपाय के बारे में बताया है जो इस समस्या से आपको बचाने में मददगार हो सकती है। शोध से पता चलता है कि तुलसी का सेवन कोर्टिसोल को 36% तक कम कर सकती है, ऐसे में तनाव से बचे रहने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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स्ट्रेस और कोर्टिसोल का संबंध - फोटो : Freepik.com
पहले जान लीजिए कि  कोर्टिसोल और स्ट्रेस का क्या संबंध है?

कोर्टिसोल एक हार्मोन है, जब इसका स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है तो शरीर पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनमें वजन बढ़ना, थकान, मनोदशा में बदलाव और हृदय संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

जब भी हमारा शरीर किसी तनाव की स्थिति में आता है, तो एड्रिनल ग्लैंड खून में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज करने लगता है। यही कारण है कि कोर्टिसोल को स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है। लगातार कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर आपके लिए हानिकारक हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के साथ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी कोर्टिसोल को कंट्रोल में रखना जरूरी है।
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तुलसी की पत्तियों से स्ट्रेस में मिलता है लाभ - फोटो : freepik
अध्ययन से क्या पता चला?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर आप तुलसी का सेवन करते हैं तो इससे  कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को कंट्रोल करना आसान हो सकता है। लिहाजा आपका स्ट्रेस लेवल भी कंट्रोल होता है।

प्रतिभागियों पर 8 सप्ताह तक किए गए परीक्षण में विशेषज्ञों ने पाया कि ये उपाय कोर्टिसोल के स्तर में 36% की कमी ला सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि तुलसी का सेवन करने से शरीर बेहतर तरीके से स्ट्रेस को कंट्रोल करने में मददगार था। प्रतिभागियों ने नींद की गुणवत्ता में भी सुधार की सूचना दी।
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तुलसी के कई सारे लाभ - फोटो : Adobe stock
कैसे करें इसका इस्तेमाल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया ये कारगर औषधि हर घर में आसानी से पाई या उगाई जा सकती है। तुलसी की पत्तियों का सेवन, इसकी चाय या फिर किसी चीज में मिलाकर इसका सेवन करना आपकी सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। ये घरों में आसानी से और मुफ्त में मिल जाती है।

तुलसी के कई सप्लीमेंट भी हैं जिनमें इसके मानकीकृत अर्क होते हैं। इसकी तय खुराक के साथ-साथ अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आप तुलसी के पत्तों को तोड़कर उसे रोजाना कच्चा भी चबा सकते हैं। यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक अभ्यास है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने, संक्रामक रोगों के खतरे को कम करने के साथ कई अन्य प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। 



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स्रोत
A randomized, double-blind, placebo-controlled trial investigating the effects of an Ocimum tenuiflorum (Holy Basil) extract (HolixerTM) on stress, mood, and sleep in adults experiencing stress



अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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