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Kidney Stone: हम पत्थर वाली चीजें तो नहीं खाते फिर कैसे बनती है किडनी में पथरी? आसान भाषा में समझिए

Sun, 17 Aug 2025 09:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पथरी होने के लिए कई कारण जैसे पानी की कमी, गलत खानपान, ज्यादा नमक, प्रोटीन आदि का सेवन जिम्मेदार हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही है उन्हें पथरी होने का खतरा और भी अधिक हो सकता है। 
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किडनी में स्टोन होने का खतरा - फोटो : Adobe stock
किडनी में स्टोन होने की समस्या काफी आम हो गई है, हर उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। पथरी देखने में चूंकि पत्थरनुमा लगती है, इसलिए अक्सर दिमाग में एक सवाल बना रहता है कि जब हम पत्थर वाली चीजें नहीं खाते हैं तो किडनी में पथरी कैसे बन जाती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी में स्टोन का पत्थर वाली चीजें खाने से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर रासायनिक गड़बड़ी का नतीजा है। शोध बताता है कि सबसे आम पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट से बनती है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में हर 6 में से लगभग 1 व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी पथरी होती है।

किडनी हमारे शरीर की फिल्टर मशीन है। यह खून को साफ करके शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है। जब हम पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते या हमारे खाने-पीने में नमक, प्रोटीन और कुछ खास तत्व (जैसे ऑक्सलेट) की मात्रा अधिक हो जाती है तो ये पदार्थ पेशाब से बाहर नहीं निकल पाते हैं और धीरे-धीरे ये छोटे-छोटे कण बनाते हैं। यही मिलकर किडनी स्टोन यानी पथरी का रूप ले लेते हैं।
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किडनी स्टोन का जोखिम - फोटो : Adobe stock
किडनी स्टोन और इसका खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पथरी होने के लिए कई कारण जैसे पानी की कमी, गलत खानपान, ज्यादा नमक, प्रोटीन आदि का सेवन जिम्मेदार हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही है उन्हें पथरी होने का खतरा और भी अधिक हो सकता है। 

सबसे आम पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन के कारण होती है। शोध के अनुसार लगभग 70–80% मामलों में यही स्टोन बनने का कारण है। हमारे दिनचर्या की कई गड़बड़ आदतें इसके खतरे को बढ़ाने वाली होती हैं जिसपर सभी लोगों को ध्यान देते रहना चाहिए।
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किडनी में पथरी होने की समस्या - फोटो : Freepik.com
जीवनशैली की गड़बड़ी से किडनी स्टोन का खतरा

हम दैनिक जीवन में कई ऐसे काम करते रहते हैं जो समय के साथ स्टोन का कारण बन सकती है। इसका सबसे प्रमुख कारण है- कम पानी पीना। कम पानी पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है, इसमें खनिज ज्यादा मात्रा में रहते हैं और क्रिस्टल बनने लगते हैं। पेशाब के माध्यम से ये शरीर से बाहर नहीं आ पाते हैं और स्टोन का खतरा हो सकता है।
  • ज्यादा नमक खाना भी नुकसानदायक है। नमक शरीर में कैल्शियम बाहर निकालने की प्रक्रिया बढ़ाता है।
  • ऑक्सलेट युक्त डाइट जैसे पालक, नट्स, चाय, कॉफी और चॉकलेट का अधिक सेवन करने से भी किडनी में पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

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किडनी स्टोन में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
किडनी में पथरी होने पर क्या दिक्कतें होती हैं?

शोध बताते है कि मोटापे और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या भी किडनी में स्टोन होने के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके अलावा पुरुषों में महिलाओं की तुलना में पथरी ज्यादा होती है, हालांकि महिलाओं में यह पीसीओएस और हार्मोनल कारणों से किडनी स्टोन होने का खतरा रहता है।

किडनी में स्टोन की समस्या कई प्रकार के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। पथरी के आकार के हिसाब से लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं।
  • आमतौर पर स्टोन की समस्या में  कमर या साइड में तेज दर्द होता है।
  • इसके अलावा पेशाब में जलन और दर्द के साथ कई बार पेशाब से खून आने, जी मिचलाने और उल्टी की भी दिक्कत हो सकती है।
  • अगर पथरी के कारण संक्रमण भी हो जाए तो इसके कारण बुखार और ठंड लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
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आहार पर दें ध्यान (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
किडनी स्टोन से बचाव कैसे करें?

आप दिनचर्या में कुछ सामान्य बातों पर ध्यान देकर भी किडनी स्टोन से बचाव कर सकते हैं। 
  • स्टोन की समस्या से बचे रहने के लिए रोज कम से कम ढाई से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
  • नमक कम खाएं, ज्यादा नमक शरीर में कैल्शियम बढ़ाता है, जो पथरी का कारण है।
  • ऑक्सलेट वाली चीजें जैसे पालक, चॉकलेट, चुकंदर की सेवन भी सीमित मात्रा में करें।
  • नींबू पानी और साइट्रेट युक्त फल का सेवन करें।ये शरीर में सिट्रिक एसिड बढ़ाते हैं, जो पथरी बनने से रोकते हैं।
  • मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम भी पथरी की वजह हो सकते हैं, इसलिए अपना वजन कंट्रोल रखें।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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