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Holi 2026: कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर रंग खेलना पड़ सकता है महंगा, होली में ये लापरवाहियां पहुंचा सकती हैं नुकसान

Wed, 04 Mar 2026 11:08 AM IST
Shikhar Baranawal हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Contact Lens Safety For Holi:  होली के रंग हमारी नाजुक आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। अक्सर लोग रंग खेलते समय लापरवाही करते हैं जिसकी वजह से आंखों में रंग चला जाता है, ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर कोई कॉन्टैक्ट लेंस पहना है तो उसके लिए ये और भी नुकसानदायक हो सकता है।
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कॉटैक्ट लेंस - फोटो : Adobe Stock
Risks Of Wearing Lenses in Holi: हम सभी जानते हैं होली में लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। मगर अक्सर ही ये देखने को मिलता है कि लोग हंसी मजाक में अपनी आंखों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। बता दें कि होली के रंग आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं, खासकर उन लोगों के लिए ये अधिक हानिकारक हो सकता है जो कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं। 

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर होली खेलना आंखों के लिए अत्यंत जोखिम भरा हो सकता है। आजकल बाजार में मिलने वाले रंगों में भारी धातुएं, कांच के बारीक कण और हानिकारक रसायन जैसे मरकरी और लेड पाए जाते हैं। जब ये रासायनिक रंग गीले या सूखे रूप में लेंस के संपर्क में आते हैं, तो वे लेंस की सतह को सोख लेते हैं और कोर्निया को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

विशेषज्ञों के मुताबिक रंगों के साथ खेलते समय लेंस के बजाय चश्मे का प्रयोग करें, क्योंकि चश्मा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। अगर आप फिर भी लेंस पहनते हैं, तो जरा सी लापरवाही 'कॉर्नियल अल्सर' का कारण बन सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आंखों में समस्या - फोटो : Adobe Stock
अगर रंग कॉन्टैक्ट लेंस के संपर्क में आते हैं तो क्या होता है?
  • कॉन्टैक्ट लेंस पोरस (छिद्रपूर्ण) होते हैं, जो केमिकल को सोखकर उन्हें लंबे समय तक आंखों की सतह पर बनाए रखते हैं।
  • रंगों में मौजूद एसिड या क्षार लेंस के साथ प्रतिक्रिया करके आंखों में तीव्र जलन और केमिकल बर्न पैदा कर सकते हैं।
  • लेंस का मटेरियल रंगों के कारण खराब या धुंधला हो सकता है, जिससे दिखाई देना कम हो सकता है।
 
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Eye scan, आंख स्कैन - फोटो : फाइल फोटो
लेंस के पीछे रंग फंसने से क्या होता है?
  • लेंस और कोर्निया के बीच फंसा रंग रगड़ पैदा करता है, जिससे कोर्निया की ऊपरी परत छिल सकती है।
  • फंसे हुए रंग के कारण वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे गंभीर इन्फेक्शन और पस बनने का खतरा रहता है।
  • यह स्थिति अत्यंत दर्दनाक होती है और समय पर इलाज न मिलने पर आंखों में स्थायी घाव बन सकते हैं।

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कॉटैक्ट लेंस - फोटो : Adobe Stock
अगर गलती से आंख में रंग चला जाए तो क्या करें?
  • सबसे पहले अपने हाथों को साफ करें और बिना देरी किए कॉन्टैक्ट लेंस को धीरे से बाहर निकालें।
  • आंखों को साफ और ठंडे पानी के छींटों से कम से कम 10-15 मिनट तक लगातार धोएं।
  • ध्यान रहे कि आंखों को बिल्कुल न रगड़ें, क्योंकि रगड़ने से रंगों के बारीक कण आंखों को जख्मी कर सकते हैं।
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कॉटैक्ट लेंस - फोटो : Adobe Stock
आंखों में लालिमा दिखने पर कितने समय इंतजार करना चाहिए?
  • आंखों में लालीमा, पानी आना या धुंधलापन दिखने पर एक पल का भी इंतजार न करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • घरेलू नुस्खे जैसे गुलाब जल या घी डालना स्थिति को और बिगाड़ सकता है, इसलिए सिर्फ डॉक्टर जो ड्रॉप्स दें उसी का प्रयोग करें।
  • मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार आंखों की चोट में शुरुआती 1-2 घंटे उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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